ट्रक से टक्कर मारकर तीन लोगों की मौत के जिम्मेदार दोषी ट्रक चालक गांव सुलगानी जिला चंबा, हिमाचल प्रदेश निवासी गंगाराम को कोर्ट ने दो साल कैद तथा 75 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस हादसे में एक बच्चे सहित तीन लोग घायल भी हुए थे। यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब नौ महीने चली सुनवाई के दौरान 12 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद वीरवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।
यह था मामला : पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 7 सितंबर, 2014 को पुलिस को सूचना मिली थी कि रादौर रोड, जोड़ियां लक्कड़ मंडी के पास एक एक्सीडेंट हुआ है, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई है। पुलिस ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस को दी शिकायत में नरेश कुमार ने कहा कि जोड़ियां नाके के पास उसकी खराद की दुकान है।
7 सितंबर, 2014 को सुबह साढ़े नौ बजे वह दुकान पर बैठा हुआ था। इस दौरान रादौर रोड की ओर से एक तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक आया, जिसने पहले एक कार को टक्कर मारी। जिस कारण कार अनियंत्रित होकर विश्वकर्मा चौक की ओर से आ रहे एक साइकिल सवार से टकरा गई। साथ ही कार नीचे की ओर दाहिनी तरफ जा गिरी। शिकायतकर्ता के मुताबिक अनियंत्रित ट्रक ने बाईपास के साइड में चल रहे बाइक सवार तथा उसके पीछे बैठी महिला को टक्कर मारी।
इसके बाद ट्रक साइड में खड़े व्यक्ति को कुचलता हुआ बंद पड़ी दुकान में जा घुसा। जिस कारण दुकान क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में बाइक सवार व्यक्ति तथा महिला की मौके पर ही मौत हो गई। जिनकी शिनाख्त गांव अंटावा निवासी रामकरण व उसकी पत्नी रानी देवी के रूप में हुई। जबकि सड़क किनारे कुचले गए व्यक्ति की शिनाख्त गांव चितराड़ा, उड़ीसा निवासी नारायण के रूप में हुई। हादसे में कार चालक विश्वकर्मा मोहल्ला रादौर निवासी मानसिंह, एक साइकिल सवार व एक बच्चा भी घायल हुए। हादसे के बाद चालक मौके से भाग गया।
पुलिस ने नरेश कुमार की शिकायत पर ट्रक चालक गांव सुलगानी, जिला चंबा , हिमाचल प्रदेश निवासी गंगाराम के खिलाफ भादंसं की धारा 304 व 308 के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। कोर्ट में करीब नौ महीने तक चली सुनवाई के दौरान 12 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने ट्रक चालक गंगाराम को दोषी करार देते हुए भादंसं की धारा 304 में दो साल कैद, 75 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि भादंसं की धारा 279 में 6 महीने कैद की सजा सुनाई है। उपरोक्त दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।