संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर में प्रॉपर्टी आईडी को फर्जी तरीके से बदलने के नए-नए मामले सामने आने के बाद खलबली मची है। पुलिस ने एक और केस दर्ज किया है। इससे कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। बिना पड़ताल के नगर निगम में कैसे किसी की भी प्रॉपर्टी दूसरे के नाम पर दर्ज हो रही है। इससे नगर निगम के कर्मचारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
एनआरआई राकेश कपूर प्रॉपर्टी को फर्जी तरीके से बेचने के मामला सामने आने के बाद एक के बाद कई अन्य मामले भी सामने आ चुके हैं। हाल ही में एक नया मामला आया था कि इस्लामुद्दीन और हैदर अली ने खाली पड़े 2016 गज के प्लाट को अपने नाम दर्ज करा लिया था। जबकि, नगर निगम के दस्तावेजों में वर्ष 2011 के सर्वे में इस प्रॉपर्टी पर किसी का भी नाम दर्ज नहीं था। नगर निगम कार्यालय अधीक्षक की शिकायत पर यमुनानगर शहर थाने में केस दर्ज कर लिया है।
लगातार मामले सामने आने के बाद अब पुलिस भी हैरान रह गई है। मामलों की जांच कर रही पुलिस का कहना है कि बिना नगर निगम के कर्मचारियों की संलिप्ता के इतने मामले सामने नहीं आ सकते। इस मामले में अब नगर निगम के कर्मचारी भी पुलिस की रडार पर आ गए हैं। पुलिस के सामने भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बिना जांच के कैसे इतनी बड़ी-बड़ी प्रॉपर्टी दूसरे के नाम पर दर्ज होगी गई। सूत्रों की माने तो जल्द ही कुछ कर्मचारियों से पूछताछ भी की जाएगी।
यह है नियम
यदि किसी को अपनी प्रॉपर्टी दूसरे व्यक्ति को बेचनी है तो उसे पहले नगर निगम से एनओसी लेनी होगी। जिसमें प्रॉपर्टी पर किसी तरह का टैक्स तो नहीं है। इसके बाद तहसील में रजिस्ट्री होगी और बाद में नगर निगम में आवेदन कर प्रॉपर्टी में नामांतरण होगा। इसके लिए कई स्तर पर जांच और मौका मुआयना भी किया जाएगा।