जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग कार्यालय। आर्काइव
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यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम में मनमानी करने के मामले में बीमा कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 61,500 रुपये का भुगतान करने के साथ इस राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये भी अदा करने के निर्देश दिए गए हैं।मामले के अनुसार गांधी धाम, जगाधरी निवासी प्रमोद कुमार ने निवार बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उन्होंने वर्ष 2020 में स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, जिसे हर साल नवीनीकृत किया जाता रहा। वर्ष 2023-24 के लिए भी पॉलिसी सक्रिय थी और इसमें पांच लाख रुपये तक का बीमा कवर था।
शिकायतकर्ता के अनुसार 23 अप्रैल 2024 को उन्हें आंख की समस्या होने पर चंडीगढ़ के ग्रोवर आई लेजर एंड ईएनटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने दाईं आंख में मोतियाबिंद होने की पुष्टि की और फेम्टो लेजर तकनीक से ऑपरेशन किया गया। इस उपचार का कुल पैकेज करीब 1.19 लाख रुपये बना। शिकायतकर्ता ने उपचार के बाद सभी दस्तावेज बीमा कंपनी को क्लेम के लिए सौंप दिए।
आरोप है कि बीमा कंपनी ने पूरे बिल का भुगतान करने के बजाय केवल 23,965 रुपये ही स्वीकृत किए और बाकी 99,750 रुपये काट दिए। कंपनी ने दावा किया कि 30 हजार रुपये टीपीए मेडिअसिस्ट द्वारा सेटल किए गए, जबकि 61,500 रुपये फेम्टो लेजर चार्ज और 8,250 रुपये ओटी दवाइयों के मद में खारिज कर दिए गए। शिकायतकर्ता ने कंपनी से बार-बार संपर्क कर पूरी राशि देने की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने नवंबर 2024 में कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। मजबूर होकर उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर कर दी।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता की पॉलिसी 2020 से लगातार चल रही थी और मोतियाबिंद जैसे रोगों के लिए निर्धारित 24 माह की प्रतीक्षा अवधि भी समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में उपचार बीमा पॉलिसी के तहत कवर था। आयोग ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि फेम्टो लेजर चार्ज 61,500 रुपये किस नियम के तहत खारिज किए गए। आयोग ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनी ने तकनीकी आधार पर वास्तविक क्लेम को खारिज कर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार किया है। इसलिए कंपनी को 61,500 रुपये की राशि शिकायतकर्ता को लौटाने के साथ 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया।
इसके अलावा आयोग ने मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये अतिरिक्त देने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर यह राशि अदा करनी होगी। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अस्सिटेंट रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने कहा कि फोरम में आने वाले सभी मामलों को बिना किसी भेदभाव के सुलझाया जा रहा है।