संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। चुनाव जीतने की जितनी टेंशन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों की बढ़ी हुई है, वहीं मतदाता भी उलझन में दिख रहे हैं। उलझन इसलिए की अभी तक मतदाता यही तय नहीं कर पाए हैं कि अंबाला व कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से जो प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं उनमें से अपना वोट किसे दें।
मतदाता दोस्तों से लेकर रिश्तेदारों तक को फोन लगा रहे हैं। बातों ही बातों में पहले उनको टटोला जाता है कि वह किस पार्टी के समर्थक हैं। यदि विचारधारा मिलती है तो वोट देने को लेकर खुल कर चर्चा शुरू हो जाती है। दरअसल मतदान का दिन पास होने के बाद भी अभी भी वोटरों का एक बड़ा वर्ग पूरी तरह से साइलेंट हैं। वह अभी तक तय नहीं कर पा रहे हैं कि 25 मई को अपना कीमती वोट किसे दें।
साइलेंट वोटर ही प्रत्याशी की हार जीत का निर्णय करेंगे। वहीं लोगों द्वारा आसपास के गांवों में ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में भी रिश्तेदारों के यहां फोन किए जा रहे हैं। यमुनानगर जिले की सीमा इन राज्यों से सटी हुई है। खासकर यूपी व हिमाचल में तो जिले के लड़के-लड़कियों की शादी बड़ी संख्या में होती है। इसलिए इन राज्यों में वोट को लेकर रिश्तेदारों की राय जानी जा रही है।
इन दोनों ही राज्यों में अलग-अलग पार्टियों की सरकार है। ऐसे में खुल कर बात हो रही है कि इस बार उनके यहां पर किस पार्टी का ज्यादा जोर है। वहीं प्रत्याशियों की अच्छाई बुराइयों पर भी चर्चा की जा रही है। इस बार तो यह भी देखा जा रहा है कि वोट को लेकर एक ही परिवार में बुजुर्गों व युवाओं की सोच बिल्कुल अलग है। यदि किसी प्रत्याशी को लेकर आपस में विचार नहीं मिलते तो उनमें अनबन जैसा माहौल पैदा हो रहा है।