यमुनानगर। पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध का असर अब पेट्रो पदार्थों पर भी दिखाई देने लगा है। कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिलने से ढाबों और होटल संचालकों को काफी परेशानी हो रही है। ढाबा और होटल संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई ढाबा संचालकों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो उन्हें वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था करनी पड़ेगी।
जानकारी के अनुसार जिले में कुल 3,89,404 गैस उपभोक्ता हैं। इनमें 3,87,682 घरेलू और 1722 कॉमर्शियल उपभोक्ता शामिल हैं। इसके अलावा जिले में कुल 32 गैस एजेंसियां कार्यरत हैं। वहीं, कॉमर्शियल सिलिंडर की किल्लत के चलते बाजार में कालाबाजारी भी शुरू हो गई है।
हालात ऐसे हो गए हैं कि कई ढाबा संचालकों को सिलिंडर न मिलने के कारण दुकानें बंद कर दी हैं, जबकि कुछ को मजबूरी में ब्लैक में महंगे दामों पर सिलिंडर खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। फिलहाल गैंस एजेंसियों ने कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति सीमित कर दी गई है और प्राथमिकता के आधार पर स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों को ही गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
निगरानी के लिए बनाई टीमें : बाजार में कॉमर्शियल सिलिंडर की कालाबाजारी को रोकने के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से निगरानी टीम का गठन किया गया है। यह टीम गैस एजेंसियों के स्टॉक, वितरण और गतिविधियों पर नजर रखेगी।
वहीं, कॉमर्शियल सिलिंडर के दाम में 1,15 रुपये की बढ़ोतरी होने के बाद इसका रेट 1962.50 रुपये हो गया है। वहीं घरेलू गैस सिलिंडर में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत 912 रुपये पहुंच गई है।
उधर, हालातों को देखते हुए अब घरेलू गैस सिलिंडर भी 25 दिन के बाद बुक कराया जा सकेगा। ये भी साल में 12 मिलेंगे।
गांव तेजली में सिलिंडर की डिलीवरी देने पहुंचा एजेंसी का वाहन। आर्काइव
गांव तेजली में सिलिंडर की डिलीवरी देने पहुंचा एजेंसी का वाहन। आर्काइव
गांव तेजली में सिलिंडर की डिलीवरी देने पहुंचा एजेंसी का वाहन। आर्काइव