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कलेक्टर रेट : गांवों, सेक्टरों व कॉलोनियों में 10 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव

Fri, 28 Mar 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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राहुल शर्मा
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यमुनानगर। जगाधरी तहसील के अंतर्गत गांवों से लेकर सेक्टरों व रिहायशी कॉलोनियों व मोहल्लों में आशियाना बनाना व खरीदना और महंगा होने जा रहा है। चूंकि यहां एक अप्रैल से लागू हो रही कलेक्टर रेट की नई दरें 10 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। इस पर प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी व अन्य लोग विरोध दर्ज करवा रहे हैं।
उनकी मानें तो दिसंबर-2024 में दस फीसदी कलेक्टर रेट की दरें बढ़ चुकी है। इस तरह 20 फीसदी (दिसंबर में बढ़ी 10 फीसदी सहित) दरें बढ़ने से अपने घर का सपना संजो रहे लोगों को बड़ा झटका लगेगा, इसलिए दोबारा बढ़ाने के बजाए मौजूदा दरों को ज्यों की त्यों लागू होनी चाहिए।
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जिला प्रशासन की ओर से एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक कलेक्टर रेट की प्रस्तावित दरों का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। हालांकि प्रतापनगर, साढौरा, सरस्वतीनगर, छछरौली, रादौर व व्यासपुर के जारी ड्राफ्ट में अधिकांश जगह कलेक्टर रेट की दरों में कोई बदलाव न कर मौजूदा दरें ही वित्तवर्ष 2025-26 में लागू करने का प्रस्ताव है। जगाधरी तहसील के अंतर्गत आने वाले इलाकों के जारी कलेक्टर रेट के ड्राफ्ट में लगभग सभी जगह दस फीसदी तक रिहायशी कलेक्टर रेट की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है। इससे जगाधरी तहसील के अंतर्गत पांचों सेक्टर, यमुनानगर की 174 व जगाधरी की 129 कॉलोनियों, मोहल्लों, गलियों सहित नगर निगम के दायरे में आ रहे 49 गांवों और नगर निगम के बाहर 95 गांवों में जमीनों के दाम अगले माह एक अप्रैल से दस फीसदी तक बढ़ सकते हैं।
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चार माह पहले ही बढ़ी तो फिर दोबारा क्यों : रिएल एस्टेट ब्रॉकर एंड इंवेस्टर एसोसिएशन के उपप्रधान मनोज पंजेटा ने बताया कि एक दिसंबर 2024 को दस फीसदी तक कलेक्टर रेट की दरें बढ़ाई जा चुकी हैं। ऐसे में चार माह में दूसरी बार दरें बढ़ाने का औचित्य नहीं है। इसीलिए इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। एसोसिएशन पांच वर्षों से दरें कम करने की मांग कर रही है, क्योंकि कोरोना काल से प्रॉपर्टी कारोबार में मंदी है। गत वर्षों में जमीन की खरीद-फरोख्त कम हुई। इससे सरकार को होने वाले राजस्व में भी कमी आई। इसलिए कलेक्टर रेट की रिहायशी दरें 30 फीसदी कम होनी चाहिएं, पर यह मांग नजरअंदाज कर बार बार दरें बढ़ाई जा रही हैं। संवाद
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