जिले में जमकर पानी की बर्बादी हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते भूजल दोहन नीचे खिसकता जा रहा है। यही हाल रहा तो भूजल लेवल काफी नीचे चला जाएगा। जबकि गर्मी सीजन चल रहा है ऐसे में पानी की खपत भी बढ़ती जा रही है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का दावा है आरओ मशीन के कारण भी साल में 14 हजार लीटर पानी की बर्बादी हो रही है। लेकिन इसे तभी बचाया जा सकता है। इसके लिए सभी की भागीदारी आवश्यकता है। इस संबंध में रजनी गोयल, जिला सलाहकार, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने बताया कि विभाग के मुताबिक मामूली लीकेज से हर महीने 250 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। स्टडी के मुताबिक लीकेज में एक नल से हर मिनट 45 बूंद पानी टपकता है यानी 3 घंटे में 1 लीटर से ज्यादा पानी बह जाता है।
रजनी गोयल ने बताया कि वहीं ब्रश करते समय वॉशवेसिन का नल खुला है तो एक बार में 4 से 5 लीटर पानी बह जाता है। यानी महीने में 150 लीटर। चार लोगों के परिवार में 600 से 700 लीटर पानी ऐसे ही बर्बाद हो जाता है।
जन स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक घर में लगे आरओ से एक लीटर पानी निकालने में 3 से 4 लीटर तक पानी बर्बाद हो जाता है। यानी 60 से 75 फीसदी पानी की बर्बादी। इस हिसाब से अगर घर में रोज 10 लीटर पानी खपत हो रहा है तो 30 से 40 लीटर पानी हम बिना इस्तेमाल किए फेंक देते हैं। यानी महीने में 1200 लीटर और साल में 14400 लीटर। इसके अलावा अगर शौचालय टैंक लीक है तो इसे रोकास जाए तो पांच लीटर पानी हर महीने बच जाएगा।
पानी की बर्बादी होने में शॉवर का भी अहम रोल है। अगर इसकी बाल्टी का प्रयोग किया जाए तो 80 फीसदी पानी बचाया जा सकता है। इसी तरह पाइप से अगर कार को धोते हैं तो एक बार में 150 लीटर पानी खर्च होता है। जबकि बाल्टी से धोने पर 20 लीटर ही प्रयोग होगा।