संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर की हवा एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में है। 22 अक्तूबर को प्रदूषण का स्तर 218 दर्ज किया गया, जबकि 23 अक्तूबर को यह बढ़कर 232 तक पहुंच गया। हालांकि शनिवार को इसमें कुछ सुधार हुआ और स्तर घटकर 151 पर आ गया। इसके बावजूद शहर में उड़ती धूल और धुएं के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों के किनारे जमा धूल और जगह-जगह जलाया जा रहा कूड़ा प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
शहर में भारी वाहन गुजरते ही सड़कों पर धूल का गुबार उठने लगता है। कई सड़कों के दोनों ओर धूल की मोटी परत जमी हुई है। वाहनों की आवाजाही के दौरान यह धूल हवा में फैल जाती है और आसपास के वातावरण को प्रभावित करती है। खासकर व्यस्त सड़कों पर धूल उड़ने से राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी होती है।
शहर की सड़कों के किनारे लंबे समय से जमा धूल वाहनों के गुजरने के साथ हवा में उड़ती रहती है। इससे आसपास के क्षेत्र में धूल का स्तर बढ़ जाता है। भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है। नियमित सफाई और धूल को नियंत्रित करने के उपाय नहीं होने से समस्या बनी रहती है।
शहर में जगह-जगह जलाया जा रहा कूड़ा : डॉ. अजय
पर्यावरणविद् डॉ. अजय गुप्ता का कहना है कि शहर में कई जगह कूड़ा जलाने के मामले भी सामने आते हैं। कूड़े से उठने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है। खुले में कचरा जलाने से आसपास रहने वाले लोगों को धुएं और दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कूड़ा जलाने पर रोक लगाने और कचरे का उचित निस्तारण सुनिश्चित करना जरूरी है। सड़कों की नियमित सफाई, धूल को नियंत्रित करने, कूड़ा जलाने पर रोक लगाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने जैसे कदम प्रदूषण कम करने में मददगार हो सकते हैं। शहरवासियों को भी खुले में कूड़ा जलाने से बचने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।