यमुनानगर। मानसून आने से पहले शहर में जाम पड़े नाले और उनमें भरी गंदगी लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। नगर निगम क्षेत्र में करीब 32 बड़े और मीडियम साइज के नाले हैं जिनकी कुल लंबाई लगभग 58 किलोमीटर है। इसके अलावा शहर में 340 छोटी ड्रेन हैं जिनकी लंबाई करीब 134 किलोमीटर है। ये सभी नाले गंदगी और कूड़े से अटे पड़े हैं।
इनकी सफाई नहीं कराई जा रही। हालांकि इस बार निगम ने पहली बार छोटी नालियों की सफाई को भी योजना में शामिल किया है लेकिन सफाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में लोगों को डर है कि यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो मानसून के दौरान हालात बिगड़ सकते हैं।
नगर निगम के अनुसार वार्ड नंबर एक से सात तक का क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है। पिछले मानसून में जगाधरी के मटका चौक, बस स्टैंड, अशोक विहार कॉलोनी सहित कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई थी।
इस बार भी शहर के कई नाले गंदगी और कचरे से भरे पड़े हैं। पटरी मोहल्ला वाला नाला, मेट्रो मोटर नाला, शिबू मेटल नाला, हनुमान गेट से धीरमल व कुंडी तालाब तक के नाले, प्रकाश चौक से त्रिकोणी और गौरी शंकर मंदिर तक के नाले, गुलाब पार्क, पाबनी रोड, जेल रोड, संत थॉमस स्कूल और पत्थरवाला बाजार क्षेत्र के नालों में भारी गंदगी जमा है। इसके अलावा अंबाला रोड पर एचडीएफसी बैंक के पास की पुलिया, जगाधरी बस स्टैंड और छोटी लाइन क्षेत्र के नाले भी जाम पड़े हैं।
नालों में कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक जमा होने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर गंदा पानी एक ही जगह जमा रहने से लगातार दुर्गंध उठ रही है जिससे आसपास रहने वाले लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
प्रकाश चौक, गंगा नगर कॉलोनी, प्रोफेसर कॉलोनी, लाजपत नगर, आजाद नगर, विष्णु नगर और खालसा कॉलेज रोड के नालों का भी यही हाल है। स्थानीय निवासी सत्यवान, सतीश और जोगिंद्र का कहना है कि सुबह और शाम के समय बदबू इतनी अधिक हो जाती है कि घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार शिकायत देने के बावजूद नालों की नियमित सफाई नहीं हो रही। सफाई कर्मी केवल औपचारिकता निभाकर चले जाते हैं, जबकि अंदर जमा गाद और कचरा जस का तस रहता है।
जगाधरी में कूड़े से अटा पड़ा नाला। संवाद
जगाधरी में कूड़े से अटा पड़ा नाला। संवाद
जगाधरी में कूड़े से अटा पड़ा नाला। संवाद