यमुनानगर में एक तरफ जहां आज के बच्चे अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं और पश्चिम सभ्यता को अपना रहे हैं वहीं गांव जुब्बल में बच्चे रामलीला के माध्यम से अपनी संस्कृति को सहेजने का काम कर रहे हैं। गांव में बच्चों की ओर से रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
आधुनिक युग में बच्चे अपना अधिक समय खेलकूद और टीवी पर कार्टून देखने में बिताना पसंद करते हैं, वहीं गांव के ये बच्चे अपनी संस्कृति बचाए रखने के लिए श्री रामलीला आयोजित कर रहे हैं। पांच से 15 साल तक के इन बच्चों के जोश, ललक और प्रतिभा को देखकर हर कोई हैरान है। ये बच्चे अपनी पॉकेट मनी के सहारे ही रामलीला पर आने वाला खर्च वहन कर रहे हैं।
ग्रामीण कुरडिया राम और पप्पू राम ने बताया कि सुविधाओं की कमी के बावजूद बच्चे अपने हावभाव और डायलॉग से दर्शकों का मनमोह लेते हैं। सभी बच्चे अपना किरदार बड़ी ही सहजता व अच्छे ढंग से निभा रहे हैं। ये बच्चे बड़े कलाकारों को मात दे रहे हैं।
श्री रामलीला कार्यक्रम में मोहित कुमार, अजय कुमार, शुभम, नितेश, राहुल कुमार, अमन, प्रीत कश्यप, कमल, संजीव व साहिल सहित अनेक बच्चे अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक शंटी कुमार और रोहित कुमार ने बताया कि बच्चों के अंदर एक प्रतिभा छुपी हुई है, जो इन्हें कभी दिखाने का मौका नहीं मिला। हमने इन सभी बच्चों की प्रतिभा और ललक को देखकर यह निर्णय लिया कि हम श्री रामलीला का आयोजन करेंगे। सभी बच्चे अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं। दशहरे पर्व पर बच्चों की तरफ से 20 फीट का रावण बना दहन कार्यक्रम भी दिया जाएगा।