childern are being taken to school from unprotected vehicle
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प्रशासन व स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े बड़े दावे करते हैं, लेकिन इसके प्रति जरा भी गंभीर नहीं है। इसका अंदाजा स्कूल की छुट्टी के समय आसानी से लगाया जा सकता है। बच्चों को शिक्षा के लिए रोजाना अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। अनफिटनेस और कंडम वाहनों में बच्चों को स्कूल से लाया और छोड़ा जा रहा है। इसके लिए सरकार के अलावा हाईकोर्ट की भी गाइड लाइन है। इसे दरकिनार कर बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। हादसे के बाद कुछ दिन प्रशासन व पुलिस सख्ती दिखाकर अपनी खानापूर्ति कर थक कर बैठी जाती है। जबकि सरेआम बच्चों को ऑटो, टाटा सूमो, मैक्सी कैब, पिकअप में ठूंस कर ले जाया जाता है। लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। बच्चों को लाद सड़कों पर फर्राटा भरते इन कंडम वाहनों में सुरक्षा को लेकर न प्रशासन गंभीर है और न ही अभिभावक जागरूक हैं। जिस कारण इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।
जिम्मेदारों का हाल यह है कि छह माह से स्कूली बच्चों को ढ़ोहने वाले वाहनों की चैकिंग तक नहीं हुई है। शहर के मुख्य चौक पर सुबह से शाम तक पुलिस तैनात रहती है। नियमों को रौंदते वाहन यहीं से गुजरते हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई तो दूर की बात। कभी इनकी पूछताछ तक नहीं हुई है। जो स्कूली बच्चों पर भारी पड़ रही है।
स्कूली बच्चों को ऑटो, मैक्सी कैब, पिकअप, टाटा सूमो, वैन में ठूंस-ठूंस कर ले जाया जाता है। सड़कों पर यह वाहन सभी को दिखाई देते हैं। इन पर कार्रवाई करने के कईं विभागों के पास अधिकार हैं। लेकिन करता कोई नहीं है। यातायात पुलिस, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण(आरटीए), सीटीएम, शिक्षा विभाग, राज्य बाल आयोग इत्यादि इस पर कार्रवाई कर सकते हैं।