संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। देश में एनआरआई से शादी संबंधी केस बढ़ रहे हैं। एनआरआई की ओर से की धोखाधड़ी या समस्याग्रस्त विवाहों से प्रभावित महिलाओं की सहायता के लिए देशभर में एनआरआई सेल बनाया जा रहा है। इस सेल से ऐसे मामले सुझाए जा रहे हैं। परंतु महिलाओं को विवाह से पहले कानूनी दस्तावेजों की सावधानी से जांच करनी चाहिए। यह बात राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या डेनिला खोंगडुप ने कही।
वे डीएवी गर्ल्स कॉलेज में एनआरआई विवाह क्या करें और क्या न करें विषय पर जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बोल रहीं थीं। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला आयोग व डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय सोनीपत की ओर से करवाया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या डेनिला खोंगडुप व हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया मुख्यातिथि रहीं। डॉ. बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. देवेंद्र सिंह विशिष्ट अतिथि रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सुमित्रा कदियान व कॉलेज प्राचार्या डॉ. सुरिंद्र कौर विशेष अतिथि रहीं। कार्यक्रम में विभिन्न गांवों के सरपंच, पंच, धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, विद्यार्थी, पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा रेनू भाटिया ने एनआरआई विवाहों से जुड़े मामलों में जागरूकता और कानूनी साक्षरता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विदेशों में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे बताया। उन्होंने कई वास्तविक एनआरआई मामलों से छात्राओं को परेशानियों के बारे बताया। वहीं, शैक्षणिक संस्थानों से युवा महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी सुरक्षा व कानूनी संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से ऐसे जागरूकता कार्यक्रम करने पर जोर दिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सुमित्रा कादियान ने कहा कि एनआरआई से शादी करने से पूर्व सभी प्रकार की जांच पड़ताल जरूरी है। हरियाणा विधिक सेवा प्राधिकरण से महिलाओं के लिए उपलब्ध कानूनी उपायों व सहायता प्रणालियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। युवतियों से शोषण या दुर्व्यवहार के मामलों में बिना किसी हिचकिचाहट के कानूनी सहायता लेने का आग्रह किया।
उपकुलपित डॉ. देविंद्र सिंह ने महिलाओं के कानूनी अधिकारों व सामाजिक सशक्तिकरण के बारे जागरूक करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों व कानूनी निकायों के बीच सहयोग का महत्व बताया। अधिवक्ता भाविका शर्मा ने एनआरआई विवाहों से संबंधित वास्तविक जीवन के केस स्टडी और कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को एनआरआई विवाह करने से पहले दूल्हे की पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति की प्रामाणिकता सुनिश्चित करनी चाहिए। ऐसे मामलों को रोकने के लिए, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, कानूनी परामर्श व जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।