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Yamuna Nagar News: उचित रखरखाव न होने से अपनी चमक खो रहा चनेटी का बौद्ध स्तूप

Fri, 18 Apr 2025 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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यमुनानगर। जिले में बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर हैं जिसके साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। इन्हीं में से एक है मौर्य राजा अशोक द्वारा 2400 साल पहले गांव चनेटी में बनाया गया बौद्ध स्तूप। यह धरोहर पुरातत्व विभाग के अधीन है। हालांकि इसकी मरम्मत कराने के लिए कई बार सर्वे कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कुछ सुधार होता नजर नहीं आ रहा है।
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राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, कुरुक्षेत्र आदि जगहों पर बने बौद्ध स्तूप पूर्ण नहीं है। हरियाणा में यह पहला ऐसा बौद्ध स्तूप है जो पूरी तरह से पूर्ण है। इसलिए यहां पांवटा साहिब, मंसूरी, देहरादून आदि जगहों से लोग पूजा के लिए पहुंचते हैं। यहां पर पीने के पानी की समस्या, शौचालय, बेंच, इंफॉर्मेशन रूम, प्रसाद आदि की उचित व्यवस्था न होने से पर्यटकों को काफी परेशानी होती है। बता दें बौद्ध स्तूप गांव के करीब 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में ईंटों से बने से 8 मीटर की ऊंचाई वाला एक विशाल मकबरा है। गोल आकार में बना, यह एक पुराना बौद्ध स्तूप है। इसे सम्राट अशोक ने बनाया था।

ये है इतिहास

इस गांव की दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 100 मीटर की परिधि में एक 20 मीटर के दायरे वाला ईंटों का विशाल टीला है। इसकी ऊंचाई 8 मीटर है। यह स्तूप नीचे से गोल और चौड़ा है। ऊपर की तरफ पतला (भीड़ा) होता जाता है। इस स्तूप के चारों तरफ 4 फीट की ऊंचाई पर चारों तरफ जीना (सीढि़यां) हैं। इस स्तूप में पीली और पक्की ईंटें लगी हुई हैं। यह बौद्ध स्तूप 10 कनाल में है। इस स्तूप के चारों तरफ सीढि़यों के लेवल पर 5 फीट का चबूतरा बना है। यहां से गए हुए अवशेष गुरुकुल झज्जर में आज भी मौजूद हैं। बौद्ध स्तूप के चारों तरफ बाउंड्री वॉल बनी है। इसी के बीच में तोरण (द्वार) बना हुआ है। यही मुख्य रास्ता जिससे शरणार्थी बौद्ध स्तूप तक सीधे आ सकते हैं, लेकिन वह भी बंद पड़ा है। संवाद
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वर्जन

जिले में जो धरोहर पुरातत्व विभाग के अधीन है उस दिशा में कार्य तेजी से किया जा रहा है। हमारी रिसर्च चल रही है। जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाने हैं। इसके अलावा चनेटी में बने बौद्ध स्तूप को लेकर जो कार्य कराए जाने है उस पर प्रक्रिया चल रही है।
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-डॉ. बिनानी भट्टाचार्य, डिप्टी डायरेक्टर, पुरातत्व विभाग।
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