यमुनानगर। खेतों में लगाई गई मक्की पर इस बार सुंडी ने अटैक कर दिया है। कई जगहों पर सुंडी ने दो से तीन इंच तक मक्की के दानों को चट कर दिया है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। सुंडी के हमले से मक्की की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे किसान बैकफुट पर आ गए हैं।
किसानों का कहना है कि सुंडी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो मक्की के उत्पादन में कमी आ सकती है। वहीं कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को सुंडी प्रभावित फसल पर कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दे रहे हैं।गुंदियानी गांव के किसान नवाब सिंह, सतीश कुमार, ऊंचा चांदना के संदीप, अनिल महमदपुर, अंकित भागू माजरा ने बताया कि किसानों ने गन्ने की कटाई के बाद फरवरी माह में मक्की की शरदकालीन बिजाई की थी।
पकने के बाद प्रति एकड़ से मक्की 30 से 40 क्विंटल तक निकल जाती है पर इस बार सुंडी ने मक्की की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। इससे प्रति एकड़ से 10 से 15 प्रतिशत पैदावार कम होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने बताया कि सुंडी छल्ली के ऊपरी हिस्से से दो से तीन इंच तक दाने को खा जाती है। इससे छल्ली के नीचे का हिस्सा भी सूखने लगता है और इसका असर पैदावार पर पड़ता है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियानी ने बताया कि इस बार मक्की की काफी फसल पर सुंडी का असर देखने को मिला। अब होने वाली बिजाई पर मिलेगा अनुदान ः मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत हरियाणा सरकार की तरफ से अब मक्की की बिजाई करने वाले किसानों को 8,000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान राशि दी जाएगी। जबकि पहले 7,000 रुपये मिलते थे। अनुदान देने के पीछे सरकार का मकसद किसानों को धान की खेती छोड़ने के प्रति प्रेरित करना है। वह इसलिए क्योंकि धान की खेती करने पर लाखों लीटर पानी की खपत होती है। भारी मात्रा में पानी के दोहन का असर भूजल स्तर पर पड़ता है। कई ब्लॉक में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। संवाद