फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सावधान! नकली रेमडेसिविर से हो रहा मरीजों की सांसों का सौदा

विज्ञापन
विज्ञापन
यमुनानगर। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड राज्यों में जीवनरक्षक दवाइयों की कालाबाजारी को लेकर शासन प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। कोरोना मरीजों के जीवन में उजाले की किरण दिखाने वाले रेमडेसिविर को लेकर लोगों में जो विश्वास है, वह अब टूटता दिखाई दे रहा है, क्योंकि मुनाफे के फेर में कुछ लोग मरीजों की जान से भी खिलवाड़ करने लगे हैं। जरूरतमंद मरीजों के तीमादारों को 10 गुना दामों में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन थमा रहे हैं। हालांकि इसको लेकर प्रशासन और पुलिस काफी गंभीर दिखाई दे रही है। यही कारण है कि यमुनानगर सहित पानीपत व पंचकूला और अन्य जिलों में कई लोगों को नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
विज्ञापन

देश-विदेश में एक ओर जहां कोरोना महामारी ने कोहराम मचाया हुआ है। वहीं दूसरी और देशभर में ऑक्सीजन, रेमडेसिविर सहित अन्य जीवनरक्षक दवाइयों की कालाबाजारी के मामले उजागर हो रहे हैं। यह अवसरवादी जरूरतमंद मरीजों की सांसों का सौदा तीमारदारों से 10 से 15 गुणा दाम लेकर कर रहे हैं। ज्यादा रकम चुकाने के बाद भी मरीज की जान बच जाए इसकी कोई गारंटी नहीं है। तीमारदार को कोई शक ही नहीं होता है कि यह जीवनरक्षक दवाई नकली है या असली। ऐसे में लोगों को चाहिए कि बाहरी व्यक्ति से जीवनरक्षक दवाई न खरीदें। सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा चयनित मेडिकल स्टोरों या संस्थानों से दवाई लेने की कोशिश करनी चाहिए।
यमुनानगर का एक आरोपी कानपुर जेल में बंद
-रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में अप्रैल माह में छछरौली के युवक को कानपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके साथ दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने तीनों पर रासुका लगाई है। इस कारण वह अभी तक कानपुर की जेल में ही बंद है। जिले में वैसे तो ऑक्सीजन की कालाबाजारी का कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया है। लेकिन रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर दो मामले प्रकाश में आ चुके हैं। हालांकि एक मामले में कानपुर ने जिले के युवक को गिरफ्तार किया है। वहीं बीते शनिवार को अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए ड्रग कंट्रोलर प्रवीण कुमार ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिस पर पुलिस ने अब सनम वोहरा नाम के शख्स को गिरफ्तार
विज्ञापन

यह था मामला
बीते शुक्रवार को एक निजी अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित वृद्ध महिला के तीमारदार को एक व्यक्ति ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन थमा दिया था। हालांकि चिकित्सक ने इंजेक्शन लगाने से पहले नकली की पहचान कर ली थी। जिस कारण इंजेक्शन नहीं लगाया। मरीज की स्थिति को देखते हुए चंडीगढ़ से रेमडेसिविर का इंतजाम करने के बीच में महिला की मौत हो गई थी। अमर उजाला में प्रकाशित ‘थमा दिया नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन’ शीर्षक खबर का संज्ञान ड्रग ऑफिसर प्रवीण कुमार ने लिया और निजी अस्पताल में पूछताछ कर सिटी थाने में तहरीर दी। जिस पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी, जिसका परिणाम यह हुआ कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
रेमडेसिविर इंजेक्शन सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिह्नित मेडिकल स्टोरों व संस्थानों से ही लेना चाहिए। यदि चिकित्सक ने रेमडेसिविर लिखा है तो पहले स्वास्थ्य विभाग में संपर्क करना चाहिए। बाहरी व्यक्ति से इंजेक्शन न खरीदें, क्योंकि वह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
विज्ञापन

-प्रवीण कुमार, ड्रग ऑफिसर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें