पिछले दिनों रेलवे स्टेशन उड़ाने की धमकी के बाद चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए स्टेशन परिसर में 40 कैमरे लगाए जा रहे हैं। जिस पर काम शुरू कर दिया। इसके तहत पंद्रह कैमरे लगाए जा चुके हैं। जबकि 25 कैमरे अभी लगने बाकी है। उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक यह लगा दिए जाएंगे। हालांकि लगाए गए कैमरों ने अभी काम करना शुरू नहीं किया है। लेकिन पूरे कैमरे लगने के साथ ही यह चालू हो जाएंगे। इसके लिए आरपीएफ थाने की जांच शाखा को कंट्रोल रूम बना दिया गया है। कंट्रोल रूम में तीन कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। जो 24 घंटे यहां से मॉनिटरिंग करेंगे। इसके लिए इन्हें विशेष रूप से प्रशिक्षत किया जाएगा।
रेलवे की ओर से परिसर में कैमरे लगाने के लिए रेलटेल (रेलवे टेलीकॉम) को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। कंपनी की ओर से 40 कैमरे लगाए जाएंगे। जिस पर काम शुरू कर दिया गया। इनमें से चार कैमरे रिवॉल्विंग (घूमने वाले) कैमरे लगाए जाएंगे। स्टेशन का प्रवेश क्षेत्र काफी बड़ा और खुला है। जिस पर निगरानी करने के लिए लंबी दूरी तक मार करने की कैमरे चाहिए। जो क्षमता रिवॉल्विंग कैमरे में होती है। एक कैमरा रिर्जवेशन केंद्र और एक यार्ड की तरफ लगाया जाएगा। वहीं टिकट घर में भी एक कैमरा लगाया जाएगा।
यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर तीन प्लटेफार्म हैं। एक नंबर पर सबसे ज्यादा 19 कैमरे लगाए जाएंगे। जबकि प्लेटफार्म नंबर दो व तीन पर 16 कैमरे लगाए जाएंगे। इसमें से दस कैमरे दोनों फुट ओवर ब्रिज पर लगाए जाएंगे। जिससे चारों तरफ निगरानी रखी जा सकेगी।
औद्योगिक, व्यापारिक व शिक्षा की दृष्टि से यमुनानगर प्रसिद्ध हैं। विभिन्न शिक्षण संस्थानों में प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी आते हैं। वहीं हजारों लोग काम करने यहां औद्योगिक ईकाइयों में काम करने आते हैं। प्रतिदिन 20 हजार लोग इस स्टेशन से सफर करते हैं। वहीं यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन को तीन बार बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। दो बार पत्र के माध्यम से तो एक बार फोन पर स्टेशन बम से उड़ाने की धमकी मिली थी।
सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल रूम आरपीएफ थाने में बनाया गया है। इसके थाने में बने जांच शाखा कमरे को कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिसमें सर्वर मशीन इत्यादि रख दी गई है। इसमें 52-52 इंच की दो एलईडी स्क्रीन लगाईं जाएंगी।
सीसीटीवी कैमरों के कंट्रोल रूम तो बना दिया गया है। लेकिन निगरानी के लिए कर्मचारी नहीं है। कंट्रोल रूम आपरेटर के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता है। लेकिन आरपीएफ थाने में अभी कोई प्रशिक्षित नहीं है कि इसकी फास्ट मॉनिटरिंग कर सके। इसके लिए थाने की ओर से हेडक्वार्टर को तीन कर्मचारियों की डिमांड भेजी गई है।
स्टेशन पर कैमरे लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। 15 कैमरे लगा दिए गए हैं। 25 लगाए जाने हैं। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा। कर्मचारियों केे लिए हेडक्वार्टर को लिखा गया है। जल्द ही कर्मचारी और आ जाएंगे।-रमेश श्योराण, कंपनी कमांडर, आरपीएफ।