हरियाणा रोडवेज परिवहन विभाग ने कंडक्टरों के लिए नया फरमान जारी किया है। अब कंडक्टरों को 52 की जगह 41 नंबर सीट पर बैठना होगा। यह सीट उनके लिए आरक्षित कर दी गई है। यदि चेकिंग के दौरान परिचालक अन्य सीट पर मिला तो कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में अब कंडक्टर को अपनी निर्धारित की गई सीट पर ही बैठना होगा।
टिकट काटने के बाद बैठना होगा अपनी सीट पर : हरियाणा राज्य परिवहन की बसों में अक्सर परिचालक-चालक के बराबर वाली सीट पर बैठते हैं। इस सीट पर चाहे कोई बुजुर्ग भी बैठा हो मगर परिचालक आकर उसे उठा देता है। फिर चालक और परिचालक दोनों ही बातचीत करने लग जाते हैैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का अंदेशा भी बना रहता है। चालक की बगल वाली सीट को लेकर रोडवेज ने अब साफ कर दिया है कि यह सीट अब स्टाफ के लिए नहीं होगी। वहीं अब नई हिदायत के हिसाब से कंडक्टर तब तक सीट पर नहीं बैठ सकता, जब तक बस में सवार सभी यात्रियों की टिकट नहीं काट दी जाती। परिचालक अगर आगे की सीट अथवा यात्रियों के साथ बैठेगा तो यात्री उसकी शिकायत महाप्रबंधक को भी कर सकते हैैं।
तीसरी बार बदला नियम : रोडवेज बसों में पहले परिचालकों के लिए ड्राइवर के साथ वाली सीट रिजर्व थी। इसे स्टाफ सीट कहा जाता है और परिचालक इसी पर बैठते थे। कुछ समय पहले सीट नंबर 52 आरक्षित की थी। यह सिस्टम कुछ ही दिन चला। ऐसे में कंडक्टर फिर से ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठना शुरू कर दिया। हालांकि चेकिंग के दौरान एक हजार रुपये का जुर्माना रखा गया था। फिर भी कंडक्टर उसी सीट पर बैठकर यात्रा करते रहे।
कौन सी सीट किसके लिए आरक्षित
सीट नंबर किसके लिए आरक्षित
1, 2 कैंसर से पीड़ित।
3 से 5 वीआईपी (मंत्री, विधायक व अन्य)।
5 से 20 तक महिलाओं के लिए।
21 से 52 तक जनरल सीट
41 नंबर कंडक्टर के लिए रिजर्व।
हेड क्वार्टर से मिले निर्देशों को सभी कंडक्टरों को बता दिया गया है। अब उन्हें 41 नंबर सीट पर बैठना होगा। यदि चेकिंग के दौरान कंडक्टर अन्य सीट पर मिला तो जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- लेखराज, रोडवेज जीएम।