संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर (यमुनानगर)। खंड बिलासपुर के रामपुरा गेंदा गांव (आदिबद्री) में प्रदेश का पहला बौद्ध कल्याणमित्र मठ बनाया जाएगा, जहां पर देश के अलावा विदेश के बौद्ध भिक्षु भी शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। इससे पहले विभिन्न देशों में इस तरह के 33 मठ स्थापित हो चुके हैं। यह कल्याणमित्र मठ शिवालिक की साथ लगती पहाड़ियों के पास तलहटी में 28 एकड़ भूमि पर बनेगा। मंगलवार को थाइलैंड से आए बौद्ध भिक्षु अजहन जयसारो महाथेरो व केवली महाथेरो ने शिलान्यास कर मठ की नींव रखी है। यह पूरा मठ अरण्य विहार ट्रस्ट की देखरेख में बनाया जाएगा।
कल्याणमित्र मठ के पहले फेस के एडमिन ऑफिस का थ्री डी नक्शा तैयार कर कार्य शुरू हो चुका है। यह इमारत अंग्रेजी वर्णमाला के एल अक्षर की तरह बनाई जाएगी। इस भवन में ध्यानकेंद्र, भगवान बुद्ध की मूर्ति, चार कुटिया, दो डोर मेट्री, एक रसोई, एक डाइनिंग हॉल, एक ऑफिस इत्यादि बनाया जाएगा। इस इमारत पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं अरण्य विहार ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी अनीश गोयल ने बताया कि इस भूमि पर लगभग 800 साल पुराना इतिहास भी दोहराया जाएगा। चूंकि लगभग 800 साल पहले विदेशी आक्रमणकारियों ने यहां के मठ को तहस-नहस कर दिया था।
मठ में बनेगी खास कुटिया, लगेंगे पेड़ पौधे
मठ में कई प्रकार की विशेष कुटिया भी बनाई जाएगी, ताकि बौद्ध आचार्य को ध्यान लगाने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो सके। इसके अलावा मठ के अंदर और बाहर सुंदर पौधे भी लगाए जाएंगे। भविष्य में इस कल्याणमित्र मठ से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। बौद्ध भिक्षु जयसारो व केवली महाथेरो ने कहा कि यह जगह पवित्र है और भिक्षुओं के साधना करने के लिए भी उचित स्थान हैं। इसके बनने से बौद्ध धर्म का प्रचार होगा, वहीं लोगों को भगवान बुद्ध से जुड़ा ज्ञान भी प्राप्त हो सकेगा।
इग्लैंड के महाथेरो को भाया भारत
महाथेरो ने बताया कि वह मूल रूप से इंग्लैंड के रहने वाले हैं। मौजूदा समय में भारत में अनेक युवाओं का सपना है कि वह इंग्लैंड में रहकर जीवन यापन करें, लेकिन उनका हमेशा से सपना रहा है कि वह भारत में आकर रहें। 1975 में 17 साल की आयु में पैदल यात्रा करके भारत पहुंचे थे। भारत में आकर हिमालय से केरल तक भ्रमण किया। इस दौरान जहां भी गए लोगों से स्नेह मिला। तीन साल तक थाईलैंड में रहकर दीक्षा ली, लेकिन उनका पहला लगाव भारत के साथ ही रहा है।