यमुनानगर। हरियाणा, यूपी, हिमाचल और दिल्ली को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से हथिनी कुंड बैराज के पास हरियाणा की तरफ बांध बनाने की परियोजना सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही। परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए तकरीबन सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी, किंतु हिमाचल की तरफ से पर्यावरण मंजूरी अब तक नहीं दी गई।
ऐसे में सिंचाई विभाग ने इसकी रिपोर्ट सीडब्ल्यूसी (सेंट्रल वाटर कमिश्नर) को भेज दी है। यह परियोजना वर्ष 2021 की है। पांच साल गुजरने के बाद भी बांध बनाने की परियोजना अटकी पड़ी है। जबकि यह हरियाणा का सबसे पहला और बड़ा बांध होगा जिस पर लगभग 6134 करोड़ रुपये भी खर्च होने हैं। संवाद
रिजर्व वायर का कुछ हिस्सा बनेगा हिमाचल : सिंचाई विभाग के मुताबिक यह बांध भी हरियाणा की सीमा में ही बनना है, किंतु रिजर्व वायर का कुछ हिस्सा हिमाचल के पांवटा साहिब तक जाएगा।
बता दें इस परियोजना से जहां हरियाणा, यूपी, हिमाचल व दिल्ली को भी लाभ मिलता है, वहीं हरियाणा के साथ-साथ यूपी व दिल्ली को भी बाढ़ से छुटकारा मिलेगा।
वहीं बांध के बनने से बाढ़ का खतरा भी कम होगा। पानी को बांध पर स्टोर किया जाएगा जिससे मांग के अनुसार ही आगे छोड़ा जाएगा। वहीं, इससे 250 मेगावाट बिजली उत्पादन भी होगा।