हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा पर यमुना नदी के किनारे बसे टापू माजरी गांव का एक भी ग्रामीण शनिवार को मतदान करने के लिए घर से नहीं निकला। ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया। जैसे ही प्रशासन को सुबह साढ़े दस बजे तक एक भी मतदान नहीं होने की सूचना दी गई तो अधिकारी आनन-फानन मौके पर पहुंचे लेकिन बात नहीं बनी। दोपहर बाद जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने गांव के सरपंच से वार्ता कर वोट की अपील की पर ग्रामीण पुल निर्माण की मांग पर अड़े रहे। शाम पांच बजे तक ग्रामीणों ने बूथ पर कोई मत नहीं डाला।
टापू माजरी गांव के ग्रामीणों के लिए राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बूथ नंबर-232 बनाया गया था, जिस पर 436 वोट है। लेकिन सुबह से दोपहर और शाम हो गई पर गांव से कोई मतदान करने के लिए पहुंचा। ग्रामीणों को मतदान के लिए प्रशासन की तरफ से मनाने के प्रयास किए गए, लेकिन सब धरे रह गए। ग्रामीण मतदान करने के लिए राजी नहीं हुए। ऐसे में सुबह से ही पोलिंग पार्टी व अधिकारियों की टीम बूथ पर मतदाताओं का इंतजार करती रही। ग्रामीणों का कहना है जब तक हरियाणा के यमुनानगर और यूपी से लगी सीमा पर पुल का निर्माण नहीं होता वो हर चुनाव का इसी तरह से बहिष्कार करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को साफ कहा कि यमुना नदी पर पुल नहीं तो वोट भी नहीं।
मामला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तक पहुंचा तो उन्होंने टापू माजरी के सरपंच अरुण से फोन पर सीधी बात की और मतदान करने की गुजारिश की। साथ ही उन्होंने डीसी और एसपी को ग्रामीणों के पास भेजने की बात कही। इस पर दोनों अधिकारी मौके पर पहुंचे और एक घंटे तक माथापच्ची की लेकिन ग्रामीण नहीं माने।
टापू माजरी के सरपंच अरुण तथा ग्रामीण कालू राम, मेम सिंह, बरिंद्र सिंह, प्रवीन कुमार, अशोक कुमार, जसबीर, सेवा राम ने बताया कि पुल निर्माण न होने से उन्हें यूपी और हरियाणा में आवाजाही के लिए 40 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है और यदि यमुना नदी पर पुल बन जाए तो मात्र 7 किमी का ही सफर रह जाएगा।
घोड़ो पीपली में भी हुआ विरोध, प्रशासन के समझाने पर माने ग्रामीण
टापू माजरी के डेढ़ किमी दूर घोड़ो पीपली के ग्रामीणों ने भी चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। यहां भी मतदान के लिए बूथ नंबर 230 और 231 बनाए गए थे। यहां तो प्रशासन ने किसी तरह से ग्रामीणों को मना लिया और मतदान शुरू कराया। लेकिन मतदान काफी धीमा रहा, दोपहर साढ़े चार बजे तक 80 वोट डले। विदित हो कि इस गांव के ग्रामीणों ने भी यमुना नदी पर पुल बनाने की मांग रखी हुई है।
उल्लेखनीय है यमुना नदी पर पुल की मांग पूरी न होने के विरोध में एक अप्रैल को घोड़ो पीपली व सात अप्रैल को टापू माजरी के ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव बहिष्कार का एलान किया था। इसे लेकर चुनाव से एक दिन यानी 24 मई को डीसी कैप्टन मनोज कुमार व एसपी गंगाराम पूनिया घोड़ो पीपली गांव में पहुंचे थे। यहां सरकारी स्कूल में दोनों गांवों के लोगों के साथ उनकी यमुना नदी पर पुल बनाने की मांग पर सुनवाई की थी। साथ ही जिस जगह पर ग्रामीण पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, उस साइट का भी दौरा किया था। तब डीसी ने ग्रामीणों को समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था।
लेना पड़ता है नाव का सहारा
टापू माजरी के ग्रामीण श्याम गुर्जर, मेम सिंह, अशोक, जसबीर आदि ने बताया कि यमुनानगर के टापू माजरी गांव अंबाला संसदीय क्षेत्र में आता है जो यमुनानगर हल्के में है। यहां तक पहुंचने के लिए यमुना नदी के पानी से होकर गुजरना पड़ता है। उसके लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर यहां पहुंचने को मजबूर हैं। इसके साथ लगभग एक दर्जन गांव ऐसे हैं जिनका यमुना के उस पार आना-जाना रहता है। अगर यह लोग सरसावा सहारनपुर से जाते हैं तो लगभग 40 किलोमीटर का सफर पड़ता है।
यमुनानगर के सीटीएम पीयूष गुप्ता का कहना है कि लोगों को समझने का काफी प्रयास किया जा रहा है और लोगों से अपील की जा रही है कि वह मतदान अवश्य करें। उन्होंने कहा कि इस समय चुनाव आचार संहिता लागू है जिसके चलते कोई काम नहीं हो सकता। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद उनके कार्य के लिए प्रयास किया जाएगा।