यमुनानगर। सहारनपुर-पंचकूला नेशनल हाईवे पर करेहड़ा खुर्द व छप्पर में फ्लाईओवर बनने का रास्ता साफ हो गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने करेहड़ा खुर्द व छप्पर के ब्लैक स्पॉट को नोटिफाई कर दिया है। एनएचएआई अब दोनों जगहों पर फ्लाईओवर बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। दोनों फ्लाईओवर बनाने पर करीब 31 करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना है। इसके लिए एनएचएआई की तरफ से ड्राइंग बना दी गई है, जिसे वित्तीय मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
दरअसल नेशनल हाईवे पर फ्लाईओवर या अंडरपास तभी बनाया जा सकता है जब उस ब्लैक स्पॉट को सरकार द्वारा नोटिफाई किया जाता है। रोड सेफ्टी की बैठक में लगभग हर बार उक्त हाईवे पर हो रहे हादसों की चर्चा होती थी, परंतु किसी ने ब्लैक प्वाइंट को नोटिफाई करने के बारे में नहीं बताया। जब इस बात का पता चला तो जिला प्रशासन की तरफ से फाइल एनएचएआई को भेजी गई। जिसके बाद सरकार ने दोनों ब्लैक स्पॉट को नोटिफाई किया। यदि इसके बारे में एनएचएआई ने पहले सूचना दी होती तो अब तक तो शायद फ्लाईओवर बनाने का काम शुरू भी हो जाता।
20 किलोमीटर में केवल दो अंडरपास
जिले में उत्तर प्रदेश की सीमा पर कलानौर से छप्पर तक में नेशनल हाईवे की लंबाई 20.6 किलोमीटर है। यह हाईवे से लगते 27 गांवों से गुजरता है। बाईपास को खजूरी-करेहड़ा खुर्द, खंडवा, हरनौल, सुढल-सुढैल, कैल, भूत माजरा, छप्पर गांवों की सड़कें मिलती हैं। इसलिए इन गांवों में बाईपास पर अंडरपास बनाने की मांग की जा रही थी। जिले में केवल करेहड़ा गांव रादौर रोड पर ही अंडरपास है। हाईवे निर्माण के समय लोगों व किसानों ने धरने भी दिए, परंतु किसी ने एक नहीं सुनी। यदि उस समय लोगों की मांग मान ली जाती तो अब फ्लाईओवर पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने की जरूरत नहीं पड़ती।
तीन साल में 110 लोगों की गई जान
सहारनपुर-पंचकूला नेशनल हाईवे पर जनवरी 2018 से दिसंबर 2020 तक हुए सड़क हादसों का रिकॉर्ड पुलिस ने तैयार किया। जिसके अनुसार हाईवे पर केवल 20 किलोमीटर में ही 185 सड़क हादसे हुए, जिनमें 110 लोगों की मौत हुई। जबकि 170 घायल हुए। छप्पर में 28 हादसों में 15 की मौत व 22 घायल हुए हैं। इसी तरह करेहड़ा खुर्द में 25 हादसों में 18 मौत व 29 घायल हुए हैं जबकि हाईवे पर ही नौ अन्य जगहों पर हुए 72 हादसों में 44 मौत व 67 लोग घायल हो चुके हैं।
सभी ब्लैक स्पॉट होने चाहिए नोटिफाई : बीएल सैनी
रादौर से कांग्रेस विधायक डॉ. बीएल सैनी का कहना है कि केवल करेहड़ा खुर्द व छप्पर ही नहीं बल्कि कैल, भंभौली समेत अन्य जगहों पर भी ब्लैक स्पॉट को नोटिफाई किया जाना चाहिए। हादसे तो सभी जगह हो रहे हैं। जब यह हाईवे बन रहा था तब भी उन्होंने इसमें फ्लाईओवर व अंडरपास नहीं बनाने का विरोध किया था। यह पहला ऐसा हाईवे होगा जिसमें न तो अंडरपास है और न ही फ्लाईओवर। सरकार की इस लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोग असमय मौत का शिकार हो गए। उस समय इतना खर्च भी नहीं आता, जितना अब करना पड़ेगा।
दो जगह नोटिफाई हो चुकी हैं : अभिमन्यु मलिक
एनएचएआई के साइट इंजीनियर अभिमन्यु मलिक का कहना है कि करेहड़ा खुर्द और छप्पर के ब्लैक स्पॉट नोटिफाई हो चुके हैं। अब जल्द ही इन जगहों पर फ्लाईओवर या अंडरपास बनाए जाएंगे। जिसके बाद सड़क हादसों में कमी आएगी।