जगाधरी में सरकार व स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधा देने का दावा कर रहे हैं। बावजूद इसके मंगलवार को एक गर्भवती महिला ने आटो में बच्ची को जन्म दे दिया।
इस घटना ने सरकार व स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल दी है। वहीं इस मामले में महिला के पति का आरोप है कि वह अपनी पत्नी को सरकारी अस्पताल में लेकर गया था, लेकिन वहां पर डाक्टरों ने उन्हें अटैंड नहीं किया। जब वह अपनी पत्नी को आटो से निजी अस्पताल लेकर जा रहा था, तो रास्ते में उसकी पत्नी के दर्द बढ़ गए और उसने बच्ची को जन्म दे दिया।
मुंडा माजरा के पास एक ईंट भट्ठे पर काम करने वाले ओमप्रकाश ने बताया कि मंगलवार को उसकी पत्नी को दर्द की शिकायत हुई। जिसके बाद वह उसे एंबुलेंस के जरिए यमुनानगर के सरकारी अस्पताल लेकर आया गया। जहां पर डाक्टरों ने एक बार उसकी पत्नी को चेक करने के बाद बिठा दिया।
ओमप्रकाश ने बताया कि जब डाक्टरों ने दो-ढाई घंटे तक उसकी पत्नी की सुध नहीं ली, तो वे दोनों बेचैन हो गए। जब उन्हें लगा कि डाक्टरों ठीक से उसकी पत्नी का इलाज नहीं कर रहे हैं, तो वह बाहर से एक आटो ले आया और अपनी पत्नी को उसमें बिठाकर जगाधरी स्थित निजी अस्पताल की ओर चल पड़ा।
ओमप्रकाश ने बताया कि जब वे अग्रसेन चौक के पास पहुंचें, तो उसकी पत्नी की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। अत्याधिक दर्द होने के बाद कारण उसकी पत्नी ने आटो में ही बच्ची को जन्म दे दिया। इसके बाद वह अपनी पत्नी को घर लेकर चला गया।
स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल
आटो में गर्भवती महिला के बच्ची को जन्म देने की घटना ने सरकार व स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी है। सरकार व स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं को मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने का दावा कर रहे हैं।
इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं को लाने ले जाने के लिए एंबुलेंस सुविधा शुरू की हुई है, लेकिन मंगलवार को हुई इस घटना को देखकर नहीं लगता कि गर्भवती महिलाओं को उनका पूरा हक मिल रहा है। ओमप्रकाश ने बताया कि उसकी पहले से पांच बेटियां है। मंगलवार को भी उसके घर बेटी ने ही जन्म लिया है।
डाक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल
मंगलवार को अस्पताल में दाखिल गर्भवती महिला आटो में बैठकर बाहर कैसे आई, इस घटना ने डाक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। जब अस्पताल में डाक्टरों ने उसका चेकअप किया, तो बावजूद इसके उसके बिना डिस्चार्ज के बाहर कैसे जाने दिया, इसका जवाब देने में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कतरा रहे हैं।
क्या सोच कर डाक्टरों ने दो से ढाई घंटे तक उसकी सुध नहीं ली, इस बारे में भी विभाग के अधिकारी स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। हालांकि सीएमओ इस मामले में जांच की बात कह रहे हैं।
मामले की जांच की जाएगी
सीएमओ डा. एमआर पासी का कहना है कि वे मामले की जांच करवाएंगे, जो भी डाक्टर दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है।