यमुनानगर के छछरौली में मुआवजे के नाम पर एक बार फिर किसानों के साथ मजाक किया गया है। जनवरी में हुई बेमौसम बरसात से खराब हुई गेहूं की फसल का किसानों को तीन, तेरह और 43 रुपये मुआवजा दिया गया है। मुआवजे की राशि से नाराज किसानों ने इसे लेने से मना कर दिया है।
जयधरी गांव के किसान रजनीकांत, सुभाष, बलिंद्र कुमार, मांगेराम, सुखबीर सिंह, टिंकू, सोनू, प्रवींद्र, जगरोशन, महिंद्र पाल आदि ने बताया कि इस वर्ष जनवरी में हुई बेमौसम बारिश से उनकी गेहूं की फसल खराब हो गई थी। मार्च महीने में पटवारी ने खराब फसल की गिरदावरी की थी।
किसानों का आरोप है कि जब पटवारी गांव में गिरदावरी करने के लिए आया था तो उसने बिना जानकारी के ही एक जगह बैठकर किसानों की खराब हुई फसलों की गिरदावरी कर दी। अब किसानों को खराब फसल का मुआवजा दिया जा रहा है। कुछ किसानों की तय की गई मुआवजे की राशि 20 रुपये से भी कम है।
छह महीने से मुआवजे की राशि मिलने का इंतजार कर रहे किसानों को जब मुआवजा राशि का पता चला तो वे हक्के-बक्के रह गए। प्रशासन की ओर से एक हजार से कम मुआवजा राशि नगद दी जा रही है।
पटवारी किसानों को राशि देने आए तो नाराज किसानों ने मुआवजे की राशि को लेने से मना कर दिया। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला तो वे इकट्ठा होकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे।
किसे कितना मुआवजा मिला
लोटन सिंह के पुत्र अंकित की डेढ़ एकड़ फसल खराब हुई थी, उसका मात्र तीन रुपये मुआवजा तय किया गया है। वहीं जयपाल की पत्नी शिमला की एक एकड़ फसल की 14 रुपये मुआवजा राशि तय की गई है। इसी प्रकार ज्ञात के पुत्र रजनीकांत की एक एकड़ फसल के लिए 286 रुपये, नोबल के पुत्र जगरोशन की डेढ़ एकड़ फसल के लिए 43 रुपये, ज्ञानसिंह के पुत्र टिंकू की एक एकड़ के लिए 287 रुपये मुआवजा राशि तय की गई है।
नियमों के तहत तय किया मुआवजा
तहसीलदार महिंद्र सिंह का कहना है चेक से दिए गए मुआवजा राशि के बारे में मुझे पता है। नगद मुआवजा राशि के बारे में पटवारी बता सकते हैं। सरकार की ओर से निर्धारित नियमों के तहत ही किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है।
अन्नदाताओं का किया अपमान
भारतीय किसान संघ के सदस्य मानसिंह मुजाफत ने कहा है कि इतना कम मुआवजा देकर सरकार ने अन्नदाताओं का अपमान किया है। भारतीय किसान संघ इसका विरोध करता है और इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता है।