साढौरा। मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी को बेहद शुभ योग बन रहा है। इस दिन भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही भौम पुष्य योग भी बन रहा है। मंगलवार को पुष्य नक्षत्र होना भौम पुष्य योग कहलाता है। जिससे सूर्य के साथ उसके मित्र मंगल का भी शुभ संयोग है।
इस दिन दान पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इससे जहां सूर्यदेव मान सम्मान बढ़ाते हैं। वहीं, मंगल जमीन जायदाद का लाभ देता है। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि विशेष यह है कि 19 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जिसमें दान, पुण्य आध्यात्मिक कार्यों से अक्षय पुण्य फल मिलता है।
मकर संक्रांति पुण्य काल
मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी सुबह आठ बजकर 41 मिनट से शुरू होगा। जबकि शाम पांच बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगा। मकर संक्रांति का महापुण्य काल सुबह आठ बजकर 41 मिनट से सुबह 10 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यह दोनों ही समय स्नान और दान के लिए शुभ हैं। इसके अलावा स्नान-दान के लिए मकर संक्रांति का पूरा दिन अच्छा माना जाता है। ग्रहों के राजा सूर्य देव जब धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस बार माघ कृष्ण प्रतिपदा में पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग में मकर संक्रांति का पर्व बहुत शुभता के साथ मनाया जाएगा। 14 जनवरी को प्रात काल 10 बजकर 17 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र और इसके पश्चात पूरे दिन पुष्य नक्षत्र रहेगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से खरमास का समापन होगा। इसके बाद मांगलिक कार्य का सिलसिला आरंभ होगा।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकल कर अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश कर एक मास व इसके बाद शनि देव की ही राशि कुंभ में एक मास निवास करते हैं। इससे यह पर्व पिता व पुत्र की आपसी मतभेद को दूर करने तथा अच्छे संबंध स्थापित करने की सीख देता है। सूर्य के मकर राशि में आने पर शनि से संबंधित वस्तुओं के दान व सेवन से सूर्य के साथ शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। कुंडली में उत्पन्न अनिष्ट ग्रहों के प्रकोप से लाभ मिलता है। मकर संक्रांति को कई अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। कुछ जगहों पर इसे संक्रांति, पोंगल, माघी, उत्तरायण, उत्तरायणी और खिचड़ी जैसे नाम से जाना जाता है।
-फोटो 58 : कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यातिथि डॉ. राजेश कुमार व साथ मौजूद प्राचार्य। स्रोत कॉ