संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन में चल रहे चातुर्मास के 12वें दिन साध्वी सुचेता ने फरमाया कि श्रावक को हमेशा जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी की वाणी जिनवाणी का संदेश आप प्रतिदिन श्रवण कर रहे की हमें कैसे चलना, कैसे बोलना, कैसे हर क्रिया को करना।
उन्होंने कहा कि हमारे समक्ष दो शब्द है केंद्र और परिधि। केंद्र हमारी आत्मा परिधि हमारी संसार एक सोया है। एक जागृत है, जैसे एक द्रव्य निंद्रा होती है दूसरी भाव निंद्रा। हम श्रम को दूर करने के लिए द्रव्य निंद्रा लेते है और भाव निंद्रा जो अज्ञान की निद्रा मैं सोए हुए है। इस अवस्था का कोई अंत नहीं है। ये है बेहोशी की अवस्था,जहां न दिशा का ज्ञान है, न दौड़ने का लक्ष्य है। हम अज्ञान मोह में सो रहे हैं, वह भाव निंद्रा है। इसलिए भगवान महावीर कहते हैं कि हमें भाव निंद्रा से निकल कर धर्म जाग्रना की और जाना है।