यमुनानगर। इस बार कपाल मोचन मेले में करीब 70 जगह 24 घंटे चलने वाले भंडारे व लंगर लग रहे हैं। यहां बन रहे मिष्ठान व अन्य पकवानों से फैली महक जहां श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही है। वहीं पंडालों से संस्थाओं के पदाधिकारी भी लगातार माइक पर श्रद्धालुओं को भंडारों व लंगर में प्रसाद ग्रहण करने के लिए बुला रहे हैं।
मेले में प्रवेश करते ही ऐसी आवाज सुनाई दे रही हैं। जिसे सुनते ही लंबी यात्रा कर पंजाब व अन्य प्रांतों से पहुंचे भूख-प्यास से व्याकुल श्रद्धालु यहां कुछ राहत पा रहे हैं। यहां न सिर्फ साधारण खाना है बल्कि विभिन्न तरह के मिष्ठान व पकवान भी उनके लिए उपलब्ध हैं। ऐसे ही 18 वर्षों से मेलास्थल में कुछ कदम दूर राजपूत धर्मशाला में बाबा बंसी वाले का भंडारा लग रहा है, जो 27 नवंबर तक लगातार चलेगा। इसके लिए बाबा बंसी वाले अन्नपूर्णा आश्रम समिति की ओर से तमाम प्रबंध पूरे हो चुके हैं। गुरुवार को पहले दिन ही धर्मशाला में दर्जनों बड़े कढाए, पतीले, बर्तनों समेत क्विंटलों में राशन व ईंधन के रूप में लकड़ी पहुंचा दिए गए थे।
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साथ ही हरिद्वार से घंटेभर में सैकड़ों रोटियां बनाने वाली मशीन भी मंगवा ली गई। यहां करनाल व यूपी के विभिन्न जिलों से 50 हलवाई व हर समय 150 सेवादार दिन-रात सेवा में रहेंगे। भंडारे में दाल, कढ़ी, चावल, पूरी, रोटी, सब्जी, चाय, हलवा समेत अन्य मिठाइयां तैयार होंगी। इसके लिए धर्मशाला में सेवादारों ने चूल्हे लगा लिए।
भंडारे की बर्फी के खूब चर्चे
बाबा बंसी वाले के भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए बर्फी, गुलाब जामुन, पकौड़े, चाट, टिक्की, जलजीरा भी मिलते हैं। यहां की बर्फी के श्रद्धालुओं में खूब चर्चे रहते हैं। हर श्रद्धालु को बाबा के दर्शनों उपरांत प्रसाद के रूप में बर्फी दी जा रही है। जिसके लिए समिति की ओर से हर दिन क्विंटलों में बर्फी तैयार होगी। इस बर्फी का धर्मशाला परिसर में बड़ा ढेर लगा है, जो देखते ही देखते खत्म होती ही दोबारा लग जाता है।
15 टीन घी से रोजाना तैयार होता है हलवा
समिति से जुड़े दिल्ली से पहुंचे सुभाष सिंघल ने बताया कि भंडारे के लिए मंगवाई रोटियां बनाने की मशीन से हर 60 मिनट में 2200 रोटियां निकलती हैं। इतनी ही पूरियां हर घंटे में सेवादार हाथों से तैयार करते हैं। सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं को भंडारे में बर्फी पसंद है, इसलिए हर दिन आठ से दस क्विंटल बर्फी लग जाती है। ऐसे ही भंडारे में रोज 10-12 क्विंटल आटा, 8-10 क्विंटल चावल, 6-7 क्विंटल दाल खप जाती है। इसके अलावा चीनी, दूध, सब्जियां व ईधन में लकड़ी क्विंटलों में लग जाते हैं।