संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। आयुष्मान कार्ड योजना के तहत चौथे दिन भी निजी अस्पतालों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाया। इससे लोगों का इलाज भी बीच में रुक गया है। कई लोग तो ऐसे हैं, जिनके ऑपरेशन होने थे, लेकिन रोक के कारण यह बीच में लटके हुए हैं। वहीं लोगों को इलाज करवाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।
आयुष्मान योजना के तहत जिले के 33 अस्पतालों में लोगों को नि:शुल्क उपचार दिया जाता है। परंतु योजना का बकाया पैसा न मिलने के कारण निजी अस्पतालों ने इलाज करने से बंद कर दिया है। इस योजना के तहत जिले के 33 अस्पतालों में होने वाले करीब 90 ऑपरेशन रुके पड़े हैं। इनमे कई बड़े ऑपरेशन भी हैं।
कई बीमारियां ऐसी हैं, कि इलाज बीच में रुकने से मरीज की जान खतरे में भी पड़ सकती है। बीच में रुका इलाज पूरा करवाने के लिए मरीज के परिजनों को ऋण उठाना पड़ रहा है। लोग विभिन्न लघु ऋण कंपनियों से ऑनलाइन कर्ज लेने को मजबूर हैं। वहीं, कई लोग बैंकों व साहूकारों के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि उन्हें इलाज के लिए पैसे मिल जाएं।
शहर निवासी प्रतीक ने बताया कि उनके पिता को कैंसर है। अभी बीमारी शुरुआत दौर में है, जिसके चलते इलाज संभव है। परंतु पिता की आयु ज्यादा होने के कारण ऑपरेशन ही सहारा है। उनका परिवार पास आयुष्मान योजना का लाभार्थी है। पहले योजना के तहत इलाज चल रहा था, लेकिन अब बीच में रुक गया।
महंगा होने के कारण वह इलाज करवाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में उसने फाइनेंस कंपनी से ऑनलाइन 1.50 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया है। 1.50 रुपये के लिए उन्हें 48 महीने में करीब 2.35 लाख रुपये चुकाने पड़ेंगे। इसी तरह राजकुमार ने बताया कि मां के इलाज के लिए उन्हें भी फाइनेंस कंपनी से निजी ऋण लेना पड़ा है।
वे जानते हैं कि निजी ऋण महंगा होता है, लेकिन इसके अलावा उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। पर्सनल लोन आसानी से मिल जाता है और उन्हें इलाज के लिए तुरंत रुपये की आवश्यकता थी, जिसके चलते उन्होंने 1.10 लाख रुपये का ऋण लिया है। इसके अलावा कई लोग बैंक व साहूकारों के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि उन्हें इलाज के लिए रुपये मिल जाए।
वहीं लोगों का कहना है कि अभी निजी अस्पतालों व सरकार में विवाद चल रहा है। संभव है कि कुछ दिनों में यह निपट जाएगा और योजना का लाभ मिलने लगेगा। परंतु इससे उन्हें कोई लाभ नहीं होगा। लाभार्थी होने के बावजूद वे कर्जदार बन गए हैं। अस्पतालों को उनका बकाया मिल जाएगा, लेकिन वे एक निश्चित समय तक लोन चुकाते रहेंगे।
चौथे दिन भी निजी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत इलाज नहीं किया गया। आईएमए के डॉ. ईश चड्ढा ने बताया कि अभी इसका कोई समाधान नहीं निकला है और सोमवार को भी अस्पताल बकाया न मिलने के कारण इलाज नहीं किया जाएगा।