संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन रविवार को किया गया। साध्वी सुमान्य भारती ने वर्तमान समाज में बढ़ रही हिंसा, अशांति, तनाव, स्वार्थ, ईर्ष्या और नैतिक मूल्यों के पतन पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य ने बाहरी संसार में अभूतपूर्व प्रगति तो कर ली है, परंतु वह स्वयं से ही दूर होता जा रहा है। आज भौतिक साधनों को प्राप्त कर के भी मानव मन अशांत, भयभीत और असंतुष्ट दिखाई देता है। आज समाज के समक्ष उपस्थित अनेक समस्याओं का मूल कारण मनुष्य का अपने वास्तविक स्वरूप से दूर हो जाना है।
साध्वी ने कहा कि जब तक मनुष्य स्वयं को केवल शरीर और बाहरी परिस्थितियों तक सीमित समझता रहेगा, तब तक उसके भीतर भय, अहंकार, क्रोध, लोभ और असंतोष जैसी प्रवृत्तियां जन्म लेती रहेंगी। इन समस्याओं का केवल बाहरी स्तर पर समाधान करने के प्रयास अस्थायी सिद्ध होते हैं। अतः आवश्यकता है उस ज्ञान की, जो मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप और उसके भीतर विद्यमान परम चेतना से परिचित कराए। उन्होंने कहा कि अपने वास्तविक स्वरूप से जुड़ कर आत्म चेतना को जागृत करना ही ब्रह्मज्ञान है।
ब्रह्मज्ञान कोई काल्पनिक अवधारणा या केवल पुस्तकों में वर्णित विषय नहीं है अपितु परमात्मा का प्रत्यक्ष अनुभव करने की एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक प्रक्रिया है। जब मनुष्य सद्गुरु की कृपा से अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना का साक्षात्कार करता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन आरंभ होता है। ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने के पश्चात हमारी सोच, दृष्टिकोण और व्यक्तित्व परिवर्तित होने लगता है जिससे हमारे व्यवहार में प्रेम, करुणा, क्षमा, संयम और सहिष्णुता जैसे गुण विकसित हो जाते हैं।
व्यासपुर स्थित आश्रम में सत्संग करतीं साध्वियां। प्रवक्ता