यमुनानगर। नोटबंदी के 17 दिन बीत जाने के बाद बैंकों में भीड़ काफी हद तक खत्म हो गई है। लेकिन बैंकों व एटीएम में कैश की समस्या अब भी बरकरार है। सूरते-हाल यह है कि एटीएम में लोगों की दिन भर लाइन लग रही हैं। जबकि बैंकों से ग्राहकों को पर्याप्त धनराशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
जिले में विभिन्न बैंकों के कुल 197 एटीएम बूथ हैं। शुक्रवार तक इनमें से 74 एटीएम ही पूरी तरह चालू हो पाए हैं। इनमें कैश डालने के कुछ घंटों में ही करेंसी खत्म हो जाती है क्योंकि एटीएम से कैश निकलवाने वालों की संख्या बहुत अधिक होती है। उधर, बैंकों में भीड़ लगभग समाप्त हो गई है, लेकिन अपने खाते से नगदी निकलवाने आ रहे ग्राहकों को पूरा कैश नहीं मिल पा रहा है।
- जगाधरी बस अड्डे के सामने स्थित एसबीआई के एटीएम बूथ सुबह करीब साढे 12 बजे बंद था। एटीएम के बाहर खड़े लोग एटीएम बूथ खुलने का इंतजार कर रहे थे। जगाधरी की रहने वाली प्रवीण ने बताया कि वह सुबह 9 बजे से एटीएम खुलने का इंतजार कर रही है। वह बच्चों की फीस व दवा के लिए एटीएम से पैस निकलवाने आई थी।
- गोमती कॉलोनी की सुदेश सुबह करीब साढे 9 बजे एटीएम बूथ पर आई थी। उन्हें घर खर्च के लिए पैसे निकलवाने थे।
- ईएसआई अस्पताल के नजदीक रहने वाली शोभा सुबह 10 बजे यहां आई थी। वह दूसरे एटीएम बूथ गई तो कहीं लंबी लाइन थी तो कहीं एटीएम बंद पड़ा था।
- मुखर्जी पार्क निवासी मीतू व सीमा सुबह सवा दस बजे एटीएम बूथ पर आकर खड़ी हुई थी।
जिले के एटीएम बूथों पर तकनीकी चेंजिंग का काम पूरा हो गया है। तीन-चार दिनों तक सभी एटीएम चालू हो जाएंगे। आरबीआई से पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं मिल रहा है इसलिए बैंकों में ग्राहकों को पूरा कैश नहीं मिल पा रहा है। यह दिक्कत भी कुछ दिनों में दूर हो जाएगी।
विपिन सरीन, लीड बैंक मैनेजर (पीएनबी)
यूं कम हो सकती है नोटों की किल्लत
-अपने खाते से उतनी ही रकम निकलवाए, जितनी जरूरत हो।
- शॉपिंग में डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करें।
- 50-100 के नोटों को एकत्र न करें, इन्हें बाजार में चलाएं ताकि बाजार में नोटों की किल्लत दूर हो सके।
- नगदी से अत्यंत जरूरी वस्तुएं ही खरीदें।
बाजारों से 50-100 के नोट गायब, कहां से मिलेंगे दो हजार के छुट्टे...
लोगों को बैंकों से 2000 रुपये के नोट मिल रहे हैं। बाजार में 100 व 50 रुपये के नोटों की भी भारी कमी है। अगर बाजार से कुछ सामान खरीदना हो तो दुकानदारों के पास 2000 के नोट के छुट्टे नहीं मिलते हैं। ऐसे में लोगों व दुकानदारों दोनों को ही भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।