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खतरे से खाली नहीं बिलासपुर हाईवे का सफर

Sat, 26 Nov 2016 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर।
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यमुनानगर। मार्ग से सटे बिजली के ट्रांसफार्मर व झूलते तार और दोनों ओर बनी खाई के बीच बिलासपुर हाईवे का करीब 15 किलोमीटर सफर खतरे से खाली नहीं है। हर वर्ष फोग सीजन में दर्जनों सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ होने के बावजूद मार्ग पर ट्रैफिक कंट्रोल के प्रंबध अधूरे हैं। धुंध बढ़ने पर मार्ग से निकलना जानलेवा हो सकता है, किंतु संबंधित विभाग इस ओर कुछ करते नहीं दिख रहे हैं।
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एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) अंबाला मार्ग से लगते रक्षक विहार चौक से बिलासपुर हाईवे (स्टेट हाईवे नंबर-1) निकलता है। करीब 2010 में हाईवे के नवनिर्माण से दोनों ओर पांच से सात फुट गहरी खाई बन गई। जबकि साथ में रखे बिजली के ट्रांसफार्मर व गुजरते तार मार्ग के बिलकुल साथ सट गए। करीब 15 किलोमीटर हाईवे के सफर में साथ लगते अधिकांश लिंक रोड कच्चे व ढलान वाले हैं और कई तीव्र मोड़ भी हैं। ट्रैफिक कंट्रोल के उचित प्रबंध न होने से मार्ग पर 24 घंटे आवाजाही के बीच हादसे की आशंका बनी रहती है। हर वर्ष दिसंबर से फरवरी तक धुंध के बीच मार्ग पर दर्जनों सड़क दुर्घटनाएं हो जाती हैं। बावजूद इसके संबंधित विभाग हादसों पर अंकुश लगाने को लेकर संजीदा नहीं हैं।

आलम ये है कि अलसुबह हल्की धुंध रहने लगी है, किंतु बिलासपुर हाईवे पर दोनों ओर सफेद पट्टी (पैज लाइन) गायब है तो कहीं फीकी पड़ चुकी है। जबकि धुंध में मार्ग के दोनों ओर खाई होने के चलते पैज लाइन होनी जरूरी है, ताकि कम विजीबिल्टि में वाहन चालक को सड़क के किनारे (खत्म होने) का पता चल पाता है। पैज लाइन के अभाव में वाहन चालक को मार्ग की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती और वाहन के सड़क से नीचे उतरने पर चालक उस पर नियंत्रण खो देता है और हादसे का शिकार हो जाता है। कई बार चालक खुद व वाहन में सवार और साथ चलते वाहन में सवार चालक व सवारियां भी दुघर्टना ग्रस्त हो जाते हैं।
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कई चौराहे व ब्लाइंड मोड, ट्रैफिक कंट्रोल के प्रबंध अधूरे:
बिलासपुर हाईवे के करीब 15 किलोमीटर रास्ते के बीच कई चौराहे व ब्लाइंड (तीव्र) मोड़ हैं। बावजूद इसके मार्ग पर पैज लाइन समेत पूर्व सूचना बोर्ड, कैटआई, ब्लिंकर, जेब्रा क्रॉसिंग जैसे ट्रैफिक कंट्रोल के प्रबंध नहीं हैं। जबकि फोग सीजन में चौराहों व तीर्व मोड़ों पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव पूर्व सूचना बोर्ड, संकेतक, कैटआई व ब्लींकर जैसे ट्रैफिक कंट्रोल डिवाइसिज होने चाहिए। ताकि धुंध में चालक को वाहन चलाने में कोई परेशानी न हो और वह खुद की व दूसरों की जान जोखिम में न डाले।

तीन फुट दूर रखे बिजली के ट्रांसफार्मर:
रक्षक विहार चौक से बिलासपुर हाईवे के दो किलोमीटर के भीतर ही मार्ग से महज करीब तीन फुट दूरी पर बिजली के ट्रांसफार्मर रखे हैं। इसके अलावा मार्ग के साथ कई जगह बिजली के झूलते तार भी सटे हुए हैं। ट्रांसफार्मर और बिजली के तारों की ऊंचाई मार्ग के लगभग बराबर हो गई है। ऐसा करीब पांच वर्ष पहले नवनिर्माण कार्य से हाईवे की ऊंचाई बढ़ने से हुआ, चूंकि बिजली के पोल खाई में ही खड़े हैं। इस कारण मार्ग से आने-जाने वाले वाहन बिजली के ट्रांसफार्मर व तारों के पास से होकर गुजरते हैं। चूंकि हाईवे पर रात के समय रोशनी का भी अभाव है, ऐसे में बिजली के ट्रांसफार्मर व तार हादसे की वजह बन सकते हैं।

फोग सीजन को मद्देनजर यातायात पुलिस की ओर से वाहनों पर रिफलेक्टर लगाने को लेकर अभियान चलाया जाएगा वहीं, बिलासपुर मार्ग पर यातायात नियंत्रण के प्रबंध पूरे करने का जिम्मा पीडब्ल्यूडी विभाग का है।
निर्मल सिंह, प्रभारी, यातायात पुलिस, यमुनानगर।

बिलासपुर हाईवे पर सफेद पट्टी समेत अन्य कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। 30 नवंबर को टेंडर खोले जाएंगे। जल्द ही यह कार्य पूरा होगा।
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आरके टिंडवाल, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर)।
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