साढौरा। कस्बे में 1975 तक सनातन धर्म सभा द्वारा शिव शक्ति रामलीला क्लब के कलाकारों के सहयोग से रामलीला का मंचन किया जाता था। तब मास्टर शक्ति प्रसाद रामलीला मंचन का निर्देशन करते थे। 1975 में मास्टर शक्ति प्रसाद के देहांत के बाद दोनों संस्थाएं अलग होकर दो जगह रामलीलाओं का आयोजन करने लगी। इस बीच 1996 में हुए आपसी समझौते के कारण दोनों सभाएं बारी-बारी से एक साल छोड़कर रामलीला का आयोजन करने लगी। कुछ समाजसेवियों के प्रयास से दोनों सभाओं में मिलाप होने से इस बार दोनों सभाएं मिलकर एक ही जगह रामलीला का मंचन कर फिर से मिसाल पेश करेगी।
अलग होने के बाद इस तरह से किया जाने लगा था रामलीला का मंचन
1975 में अलग होने के बाद शिव शक्ति रामलीला क्लब द्वारा पुरानी सब्जी मंडी में तथा सनातन धर्म सभा द्वारा मनोकामना मैदान में रामलीला का मंचन किया जाता था। दिवंगत समाजसेवी रघुबीर शरण अग्रवाल ने 1996 में दोनों सभाओं की बैठक बुलाई थी। उनकी मध्यस्थता से दोनों सभाओं में आपसी समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार दोनों सभाओं द्वारा एक साल छोड़कर रामलीला का मंचन करने पर सहमति हुई। तय समझौते के अनुसार सनातन धर्म सभा ने अपनी बारी के अनुसार दो साल तक तो रामलीला का मंचन किया। इसके बाद सभा के पदाधिकारियों ने रामानंद सागर कृत रामायण को बड़े पर्दे पर दिखाना शुरू कर दिया लेकिन शिव शक्ति रामलीला क्लब द्वारा अपनी बारी पर पहले की तरह रामचरित मानस का मंचन किया जाता रहा है।
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इंद्रसेन की इच्छा थी कस्बे में एक ही रामलीला हो : सैनी
शिव शक्ति रामलीला क्लब के प्रधान धर्मपाल सैनी ने बताया कि उनकी संस्था के संरक्षक रहे स्वर्गीय इंद्रसेन वर्मा की इच्छा थी कि कस्बे में एक ही जगह रामलीला का आयोजन होना चाहिए। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए दोनों सभाओं का मिलाप किया गया है।
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स्टेज पर दोनों सभाओं का लगेगा बैनर : गर्ग
सनातन धर्म सभा के प्रधान सुधीर गर्ग ने बताया कि इस बार स्टेज पर दोनों सभाओं का बैनर लगेगा। सनातन धर्म सभा रामलीला का प्रबंध करेगी जबकि शिव शक्ति रामलीला क्लब के कलाकार मंचन करेंगे। इस बार 24 सितंबर से मनोकामना मैदान में रामलीला का मंचन शुरू होगा।