यमुनानगर। नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी चुनाव को लेकर जारी किए वार्डबंदी के ड्राफ्ट का विरोध होने लगा है। इस बार वार्डों के क्षेत्र व सीमाएं समझाने के लिए वार्डबंदी के ड्राफ्ट में प्रॉपर्टी मालिक के नाम के स्थान पर जगह-जगह प्रॉपर्टी आईडी दी गई हैं। इस पर पूर्व पार्षदों को एतराज है। उनकी मानें तो प्रॉपर्टी आईडी से वार्डों के क्षेत्र व सीमाएं समझना आम जनता तो दूर पूर्व पार्षदों के लिए भी मुश्किल है, इसलिए प्रॉपर्टी आईडी के बजाए प्रॉपर्टी मालिक का नाम या आसपास प्रमुख लैंडमार्क दिए जाने चाहिएं। इसी मांग को लेकर वार्ड-8, 13, 16 के पूर्व पार्षद बुधवार को लिखित मांग पत्र के साथ नगर निगम आयुक्त आयुष सिन्हा से मिले पर व्यस्तता के कारण निगमायुक्त ने उन्हें गुरुवार (आज) सुबह 11 बजे मुद्दे पर चर्चा का समय दिया।
ज्ञात हो कि नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी की वार्डबंदी का ड्राफ्ट शहरी स्थानीय निकाय ओर से ने शनिवार को सार्वजनिक कर दिया गया। इसके तहत नगर निगम कार्यालय के सूचना पट्ट पर वार्डों की सीमाओं की अनुसूची चस्पाई गई थी। इसके बाद से कई पूर्व पार्षद व चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदार नई वार्डबंदी के आकलन में लगे हैं, पर वह इस बार वार्डबंदी ड्राफ्ट में जगह-जगह दी गई प्रॉपर्टी आईडी की उलझन में फंसे नजर आ रहे हैं। क्योंकि इस बार हर वार्ड की सीमाएं व क्षेत्र बताने के लिए ड्राफ्ट में अलग-अलग प्रॉपर्टी आईडी संख्या दी गई हैं। यह प्रॉपर्टी आईडी वार्ड में किस क्षेत्र की है, यह पता नहीं लग पा रहा है। ऐसे में वार्डों के लोग ही नहीं बल्कि पूर्व पार्षद भी उनके वार्ड में कौन-सा व कितना क्षेत्र शामिल हैं और उसकी सीमाएं कहां तक है, यह समझ नहीं पा रहे हैं। इसी मसले में बुधवार को पूर्व पार्षदों में वार्ड आठ, 13 व 16 से पूर्व पार्षदों में विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने नगर निगम आयुक्त आयुष सिन्हा से मिलना चाहा, पर व्यस्तता के चलते निगमायुक्त ने मामले में गुरुवार (आज) सुबह 11 बजे चर्चा करने बुलाया। संवाद
वार्ड के क्षेत्र व सीमाएं पता नहीं तो कैसे देंगे आपत्तियां व सुझाव
विनोद मरवाह, निर्मल चौहान व जसबीर सिंह ने कहा कि वार्डबंदी के ड्राफ्ट में जगह-जगह प्रॉपर्टी आईडी दी गई हैं। कौन सी प्रॉपर्टी आईडी वार्ड में किस क्षेत्र की है, यह समझ पाना आमजन तो दूर वार्ड के पूर्व पार्षदों के लिए भी कठिन है। प्रॉपर्टी आईडी किस प्रॉपर्टी मालिक के नाम पर है, यह जानने के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रक्रिया जटिल है और इसमें समय भी अधिक लग सकता है। इसलिए प्रॉपर्टी आईडी के स्थान पर वार्डबंदी के ड्राफ्ट में प्रॉपर्टी मालिक के नाम या आसपास के लैंडमार्क होने चाहिए, जिससे वार्डों के क्षेत्र व सीमाएं आमजन भी आसानी से समझ पाएं।
वार्डबंदी के ड्राफ्ट जारी किए कई दिन बीत चुके हैं, पर अभी तक उन्हें यह नहीं पता लग पाया है कि उनके वार्ड में कौन-सा नया क्षेत्र शामिल किया गया और कौन-सा पुराना क्षेत्र किसी अन्य वार्ड में शामिल किया गया। साथ ही वार्डों की सीमाएं कहां तक है, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। ऐसे में वह निर्धारित समय में किस तरह वार्डबंदी के ड्राफ्ट पर आपत्तियां व सुझाव दे पाएंगे। इसलिए गुरुवार को निगमायुक्त से मिलकर वार्डबंदी में ड्राफ्ट में संशोधन कर प्रॉपर्टी आईडी के स्थान पर या इसके साथ ही प्रॉपर्टी मालिक का नाम और आसपास के लैंडमार्क दिए जाने की मांग होगी। जिससे आमजन भी वार्डबंदी को आसानी से समझे और उस पर अपने आपत्तियां व सुझाव दे पाएं।