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चिंता और अवसाद ही दुखों का कारण : मीना

Mon, 02 Sep 2024 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती ने कहा कि मनुष्य के मन की चिंता एवं अवसाद ही उसकी पीड़ा एवं दुख का कारण हैं।
उन्होंने बताया कि परमात्मा ने मानव का सृजन कर उसके भीतर मन, चित्त एवं बुद्धि को समाहित किया है, ताकि वह विवेकशील होकर सृष्टि का सिरमौर होने का कर्तव्य निभा सके। लेकिन सकारात्मक दिशा के अभाव में मनुष्य स्वयं के ही पतन का कारण बनता जा रहा है। जिस प्रकार बिन जल वृक्ष सूख जाता है, उसी प्रकार बिन अध्यात्म और सकारात्मक विचारों के मनुष्य का मन, चित्त एवं बुद्धि शुष्क एवं नकारात्मक हो जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि संत महापुरुष समझाते हैं कि यदि जीवन में प्रभु का चिंतन होगा, तो चिंता स्वयं ही समाप्त हो जाएगी। संसार का चिंतन एवं स्वयं को ही करता मान लेना ही चिंता का कारण है। जब हम सर्वस्व प्रभु को सौंपकर अपना हर कार्य पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से करते हैं, तो उसका परिणाम सदैव सुखद ही होता है। परमात्मा हम सभी को जीवन में कई अवसर देता है, जब हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा की ओर अग्रसर कर सकते हैं।
गुरु सत्संग या भक्त का मिलना ही वे स्वर्णिम अवसर हैं। जब हम अपने अवसाद एवं चिंताग्रस्त जीवन को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर कर सकते हैं। कोई भी कार्य करने के लिए प्रकाश की अति आवश्यकता है। हमारे जीवन में गुरु, अध्यात्म एवं भक्ति उस प्रकाश के स्रोत की तरह कार्य करते हैं, जो हमें प्रत्येक क्षण सकारात्मक दिशा की ओर प्रेरित कर जीवन को परम लक्ष्य तक ले जाते हैं।
हमारे जीवन का उत्थान तभी संभव है जब हम अपना अहंकार, ईर्ष्या और दुर्विचारों को त्यागकर पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु की शरणागत होकर उनसे ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्राप्त करके परमात्मा के दिव्य प्रकाश से जुड़े। चिंता से होने वाला तनाव व अवसाद इत्यादि बीमारियों के निदान के लिए हम कई तरह की दवाओं का उपयोग करते हैं जो हमारे जीवन के लिए घातक होती हैं।
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उन्होंने कहा कि सदैव अध्यात्म से पोषित हुआ भारत आज अपनी ही संस्कृति एवं धरोहर भुलाकर दयनीय स्थिति में है। अगर हम अपनी भावी पीढ़ी को चिंता मुक्त देखना चाहते हैं तो हमें समझना होगा कि चिंतन ही चिंता का एकमात्र निदान है। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से ईश्वर व गुरु की महिमा का गुणगान किया।
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