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बिना पर्ची के नहीं मिलेंगी एंटी बायोटिक दवाएं

Sat, 19 Apr 2014 12:36 AM IST
यमुनानगर
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यमुनानगर। यदि आप किसी केमिस्ट की दुकान पर एंटी बायोटिक दवा लेने जा रहे हैं, तो पहले किसी प्रशिक्षित डॉक्टर की सलाह पर उससे संबंधित पर्ची जरूर बनवा लें। क्योंकि केमिस्ट की दुकानों पर बहुत-सी एंटी बायोटिक दवाएं अब आपको बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिल पाएंगी।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 30 अगस्त 2013 को जारी अधिसूचना को मार्च 2014 से अमल में दिया है। इसके तहत शेड्यूल एच-1 के अंतर्गत आने वाली दवाओं को बिना प्रशिक्षित डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन बेचने पर पाबंदी लगा दी गई है।

इसके विरोध में जिले के केमिस्टों ने डीसी को राज्यपाल के नाम सौंपे ज्ञापन में फैसला वापस लेने की मांग की थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के बीच में जाने से यह मांग बीच में ही लटक गई। फिलहाल जिले में करीब 870 मेडिकल और केमिस्ट दुकानों पर विक्रेता नियमानुसार एच-1 श्रेणी में शामिल 46 दवाओं को डॉक्टर की पर्ची लेकर ही बेच रहे हैं।
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बिना सलाह एच-1 दवाएं लेना खतरनाक
विशेषज्ञों की मानें तो जिन दवाओं को एच-1 सूची में शामिल किया गया है, वे कई परिस्थितियाें में मानव शरीर के लिए बड़ी खतरनाक साबित हो सकती हैं, इसलिए इन दवाओं को बिना विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के नहीं लेना चाहिए। इसी को ध्यान में रख विभाग की ओर से इस सूची में करीब 46 दवाइयों को शामिल किया और उनके विक्रय के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर की पर्ची होना अनिवार्य किया है।

केमिस्टों को तीन साल तक रखना होगा रिकॉर्ड
विभाग ने एच-1 श्रेणी की 46 दवाओं के लिए न केवल डॉक्टर की पर्ची को अनिवार्य किया, बल्कि केमिस्ट इसमें कुछ गड़बड़ी न कर सकें, इसके लिए भी एक पैंतरा अपनाया है। केमिस्टों को एच-1 श्रेणी में आने वाली सभी 46 दवाइयों के लिए बाकायदा एक रजिस्टर तैयार करना होगा। इसमें दुकान पर उपलब्ध एच-1 श्रेणी की दवाओं के ब्योरे के साथ पर्ची लिखने वाले डॉक्टर और मरीज का नाम-पता आदि का रिकार्ड तीन साल तक रखना होगा।

बिना पर्ची के बेची दवा तो होगी कार्रवाई
विभाग की ओर से जारी अधिसूचना को लेकर कोई केमिस्ट कोताही न बरत सके इसके लिए भी कड़े कदम उठाए हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो यदि कोई भी केमिस्ट बिना पर्ची के दवा बेचता पाया गया तो इसे अपराध की श्रेणी में रखते हुए उक्त के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, केमिस्टों द्वारा तैयार किए जाने वाले रजिस्टर को विभागीय टीम की ओर से दवा बेचने की तारीख से तीन साल तक कभी भी चेक किया जा सकता है।
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