जगाधरी। स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों पर रोक नहीं लग पा रही है। विभाग की ओर से एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य करने के बावजूद अधिकतर निजी स्कूल संचालकों की मनमानी जारी है। यही नहीं स्कूलों में ड्रेस भी निर्धारित दुकानों से खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव दिया जा रहा है, इससे लोगों में रोष है। मंगलवार को इस मामले को लेकर दर्जनों अभिभावक अनाजमंडी में जमा हुए। यहां उन्होंने निजी स्कूलों के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही प्रशासन व शिक्षा विभाग के प्रति भी रोष जताया। अभिभावकों ने अनाजमंडी में टेंट लगाकर सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक धरना दिया और सरकार, निजी स्कूल प्रबंधक, शिक्षा विभाग व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता साहब सिंह गुर्जर ने कहा कि निजी स्कूलों में अभिभावक लूट पखवाड़ा चल रहा है। दाखिले के दौरान अभिभावकों को मनमानी तरीके से लूटा जा रहा है। स्कूल नियम कानून दरकिनार कर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगा रहे हैं। जबरन अभिभावकों को नए सत्र में नई वर्दी खरीदने के लिए दबाव दिया जा रहा है। साथ ही अभिभावकों को स्कूलों की निर्धारित दुकानों से किताबें व वर्दी खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग और प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। स्कूलों में बड़ी कक्षाओं में एक दो एनसीईआरटी की किताबों के साथ अधिकतर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग भी जिम्मेदार हैं। पिछले साल भी पुस्तक विक्रेता के यहां मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने दबिश की थी। निजी स्कूलों पर विभाग ने शिकंजा भी कसा था, लेकिन इस बार कहीं कार्रवाई नहीं की गई। इससे निजी स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं। पिछले साल की तुलना में 25 से 30 प्रतिशत महंगी किताबें बेची जा रही हैं। उन्होंने मनमानी करने वाले स्कूल संचालकों पर अंकुश लगाने की मांग उठाई है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि प्रशासन, विभाग व सरकार इस पर कार्रवाई नहीं करेगी तो अभिभावक सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।