संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन ने बुधवार को जिला सचिवालय के सामने अनाज मंडी गेट पर एक दिवसीय जिला स्तरीय धरने का आयोजन किया। धरना राज्य व जिला प्रधान कमलेश देवी की देखरेख में हुआ। जिलेभर से सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सेविकाओं ने भाग लिया। इसके बाद उन्होंने जिला सचिवालय में पहुंच कर डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
मुस्तफाबाद की वीना रानी व राजरानी ने कहा कि आईसीडीएस योजना को शुरू हुए हुए लगभग 50 वर्ष हो गए हैं। यह योजना दो अक्तूबर 1975 में चलाई गई थी। भारत सरकार द्वारा चलाई गई पहली ऐसी योजना होगी जिसको चलते हुए 50 साल हो गए हैं। फिर भी सरकार हमें कर्मचारी का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं है। सरकार की इन गलत नीतियों के कारण ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सेविकाओं ने समाज में कोई भी सम्मान नहीं पाया।
सरकार की योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाने का कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही कर रही हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को जो भी कार्य दिया गया उसने पूरी निष्ठा के साथ किया और सरकार की योजनाओं को सफल बनाया। परंतु, सरकार ने कभी भी उनकी स्थिति को सुधारने के लिए कोई संज्ञान नहीं लिया। उन्हें न तो आर्थिक सुरक्षा दी और न ही कोई चिकित्सा सहायता।
रादौर की प्रधान सर्बजीत कौर ने कहा कि 14000 रुपये के मानदेय में एक सिंगल मदर किस प्रकार इतनी महंगाई में अपने परिवार का खर्चा चलाती होगी। सेविका को इससे भी आधे पैसे मिलते हैं। सरकार को इतना तो मानदेय देना चाहिए ताकि वह अपने परिवार की गुजर बसर कर सके। न तो आंगनबाड़ी का किराया समय पर आता है और न ही राशन बनाने का ईंधन का पैसा समय पर आता है। ऑनलाइन काम करने के लिए सिम नहीं दिए गए हैं। नेट का रिचार्ज भी पर्याप्त नहीं है। काम करने के लिए जो फोन दिए गए हैं वह सरकार की एप चलाने के लिए सक्षम नहीं हैं।
आज की की स्थिति है कि आंगनबाड़ी का किराया आए हुए आठ महीने हो गए हैं। धरने मे रादौर की सर्बजीत, स्वर्ण कौर, सुनीता, सुषमा, मुस्तफाबाद से वीना रानी, राजरानी, हरविंदर कौर, सरोज बाला, छछरौली से मिथिलेश गुप्ता, विजय शर्मा, रमेश कौर, इकबाल कौर और जगाधरी अर्बन से सुनीता, रीटा कत्याल, मीनू किरण नीरू गौतम, अंग्रेजों, सुमित, गुलशन और जगाधरी ग्रामीण से ओमवती, इंदिरा, अमरजीत, व्यासपुर ब्लॉक से सविता, इंद्रजीत, ममता रानी, शशि, सढौरा से प्रेम और गुरविंदर कौर समेत अन्य मौजूद रहे।