खंड रादौर के टोपरा कलां गांव में बनी राम कुंडी जगह के पास खुदाई के दौरान पहली बार प्राचीन समय के सिक्के निकले हैं। यह सिक्के 17 वीं शताब्दी के बताए जा रहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह गांव ऐतिहासिक धरोहर है और यहां कई शताब्दियों की प्राचीन वस्तुएं दबी पड़ी हैं। जो बौद्ध और मुगल काल के अलावा कुषाण काल, गुप्त काल, मुगलकाल और हड़प्पा काल से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में यहां की भूमि का सर्वे किया जाना चाहिए ताकि प्राचीन समय की धरोहर को संजोया जा सके।
टोपरा कलां गांव में अभी तक टेरा कोटा, मालाएं, दीये, ठीकरे, पुराने बर्तन और अब प्राचीन सिक्के निकल चुके हैं। प्राचीन ठीकरों का बात करें तो जो अभी गत दिवस पहले निकले हैं जिनकी जांच के लिए स्वयं पुरातत्व विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बिनानी भट्टाचार्य गांव में आई थी। उन्होंने भी इन्हें तीन हजार 700 साल पुराने और यहां बुद्ध आने के समय के बताया है। यहां तक उन्होंने पूरे गांव का भ्रमण भी किया था। उल्लेखनीय है यही वो टोपरा कलां गांव जिसके इतिहास के बारे में जी-20 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मेहमानों को रूबरू कराया था। बता दें मौर्य वंश के सम्राट अशोक की बौद्ध शिक्षाओं को समर्पित टोपरा कलां बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां स्थापित अशोक चक्र आज भी पर्यटकों और इतिहासकारों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वर्तमान में टोपरा गांव प्राचीन टीले पर स्थापित है
सिक्कों को देखकर लग रहा ये 17वीं शताब्दी के हैं। इस गांव के इतिहास के बारे में काफी सुना और पढ़ा भी है। सिक्के काफी प्राचीन है इसलिए अमूल्य भी। टोपरा कलां ऐतिहासिक धरोहर है जहां पर शौध के लिए काफी कुछ है।
-राजेंद्र राणा, फॉर्मर क्रिएटर, श्री कृष्णा म्यूजियम कुरुक्षेत्र।
टोपरा कलां में इससे पहले भी कई प्रकार की ऐतिहासिक वस्तुएं निकल चुकी हैं। यहां कुषाण काल, मुगल काल, हड़प्पा काल के दौरान के पुराने बर्तन और ठीकरे मिल चुके और अब पहली बार सिक्के निकले हैं।
-सिद्धार्थ गौरी, जनरल सेक्रेटरी, द बुद्धिस्ट फोरम।