यमुनानगर। शिवालिक की पहाड़ियों की गोद में स्थित व्यासपुर खंड के भगवानपुर गांव में मां मंत्रा देवी के दरबार में नवरात्र के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर की विशेष मान्यता है कि यह मां मंत्रा देवी का विश्राम स्थल है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत यहां पूरी होती है। मंदिर परिसर में पिछले 22 वर्षों से देसी घी की अखंड ज्योति प्रज्वलित है। यहां ललिता देवी, भगवान शिव और हनुमान जी के मंदिर भी हैं।
नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 150 मीटर की सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। वहीं मां के जयकारे लगाते श्रद्धालुओं का उत्साह उनकी थकान पर भारी पड़ता है। मां के दरबार में हरियाणा के अलावा पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से भी श्रद्धालु मां के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में अष्टमी पर 19 अक्टूबर को सुबह से शाम पांच बजे तक भंडारा आयोजित किया जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार पीढ़ियों से गांव के लोग मंदिर में सेवा करते आ रहे हैं। करीब 30 वर्षों से नवरात्र की अष्टमी पर भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर में अष्टमी पर करीब 150 कन्याओं का बैंड-बाजे के साथ स्वागत किया जाएगा। इसके बाद कन्या पूजन, भोजन और उपहार देने की परंपरा निभाई जाएगी।
मंत्रों से प्रकट हुई थीं मां मंत्रा देवी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां मंत्रा देवी का प्राचीन मंदिर आदिबद्री क्षेत्र की शिवालिक पर्वत शृंखलाओं में स्थित है। यह स्थान यमुनानगर-जगाधरी से बिलासपुर, रणजीतपुर और काठगढ़ होते हुए पहुंचा जा सकता है। मंदिर से जुड़ी लोककथा के अनुसार, भगवान विष्णु सरस्वती नदी के उद्गम स्थल के निकट पृथ्वी के कल्याण के लिए तपस्या कर रहे थे। मान्यता है कि देवी लक्ष्मी ने बेरी के पेड़ का रूप धारण कर भगवान विष्णु को छाया प्रदान की थी।
कथा के अनुसार विष्णु जी की तपस्या पूरी होने पर देवताओं ने यज्ञ किया। इसी यज्ञ से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई। बाद में लक्ष्मी जी अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुईं। तब भगवान विष्णु ने दिव्य कन्या को शक्ति प्रदान कर पर्वत शिखर पर निवास करने का वरदान दिया। मान्यता है कि यही देवी कलियुग में मां मंत्रा देवी के नाम से प्रसिद्ध हुईं। मंदिर में नर-नारायण की लाल पत्थर पर अंकित पिंडी स्वरूप प्रतिमाओं की पूजा की जाती है।
कपाल मोचन मेले में आने वाले श्रद्धालु भी पहुंचते हैं
कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले कपाल मोचन मेले में आने वाले अनेक श्रद्धालु आदिबद्री क्षेत्र में सरस्वती नदी के उद्गम स्थल, आदि नारायण मंदिर और केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मां मंत्रा देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह क्षेत्र धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का विशेष संगम है। शिवालिक की पहाड़ियों से दिखाई देने वाले मनोरम दृश्य और मंदिर में गूंजते माता के जयकारे यहां आने वाले भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं। संवाद
शिवालिक की पहाड़ी पर बना माता मंत्रा देवी का मंदिर। आर्काइव- फोटो : samvad