यमुनानगर। राजकीय आदर्श संस्कृति प्राइमरी स्कूल बिलासपुर अपनी पढ़ाई के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यही वजह है कि इस स्कूल में बच्चे का दाखिला कराने के लिए अभिभावकों में होड़ सी मची रहती है। फिलहाल स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक करीब 800 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ 10 शिक्षक ही रह गए है।
पहले स्कूल में 33 शिक्षक थे। अब मात्र 10 रह गए हैं। इनमें से भी एक-दो निजी कार्यों से छुट्टी पर ही रहते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल में किस तरह की पढ़ाई हो रही होगी। अभिभावक स्कूल में शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं कि उनके बच्चे को कुछ आता भी नहीं है। वह पढ़ाई में कमजोर हो गए हैं।
दरअसल 23 शिक्षकों का तबादला अप्रैल में शिक्षा विभाग ने दूसरे स्कूलों व जिलों में कर दिया था। तब से यह पद खाली पड़े हैं। शिक्षा विभाग ने इसमें नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की। जब से शिक्षकों का तबादला हुआ है तब से स्कूल में पढ़ाई का हाल खराब है। शिक्षक न होने से एक-एक कमरे में 80 बच्चे बिठाने पड़ रहे हैं, वह भी अलग-अलग कक्षा के।
इस पर जो पाठ्यक्रम पहली कक्षा के बच्चे पढ़ते हैं, वही दूसरी व तीसरी कक्षा के भी पढ़ते हैं। बच्चों को समझ ही नहीं आता कि उन्हें मास्टर जी का पढ़ाया हुआ कौन सा पाठ याद करना है। एक कमरे में विभिन्न कक्षाओं के बच्चे बैठने से पढ़ाई की खिचड़ी पक रही है। पहले बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्कूल में कमरों की काफी कमी थी।
काफी समय से नए कमरे बनाने की बात भी चल रही है। शिक्षकों का तबादला होते ही बिना बनाए ही कमरों की संख्या पूरी हो गई है। यहां तक की अब कमरे ज्यादा हो गए हैं। वक्योंकि जो बच्चे पहले अपनी-अपनी कक्षा में बैठते थे, वह अब एक ही कमरे में बैठ रहे हैं। एक कमरे में 80 बच्चों को बिठाया जा रहा है। ऐसे में आधे कमरे खाली हो गए हैं। संवाद
बीईओ के हाथ में कुछ नहीं : प्रेमलता
बीईओ बिलासपुर प्रेमलता का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले बिलासपुर ब्लॉक से 150 शिक्षकों का ट्रांसफर कर दिया गया था। शिक्षकों को मैं खुद तो बना नहीं सकती। यहां कई स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नहीं हैं। बड़ी मुश्किल से शिक्षकों को एडजस्ट कर रखा है। सरकार को शिक्षकों की तैनाती करनी चाहिए। बीईओ के हाथ में कुछ नहीं होता। शिक्षक आएंगे तो स्कूलों में लगा दिए जाएंगे।