पत्रकारों से बात करते भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतनमान। प्रवक्ता
व्यासपुर। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने अमेरिका के साथ किए जा रहे कथित कृषि उत्पाद समझौते को भारतीय किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह डील देश के अन्नदाताओं को बर्बाद करने और खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की साजिश है। रतनमान ने तीखा बयान देते हुए कहा कि सरकार विदेशी दबाव में आकर देश के किसानों की रोजी-रोटी बेचने पर तुली हुई है। वह बुधवार को कस्बा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
रतनमान ने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में किसानों को भारी सब्सिडी, आधुनिक मशीनें और बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा मिलती है। अगर ऐसे देशों के सस्ते कृषि उत्पाद भारत में खुलकर आने लगे, तो भारतीय किसान अपनी फसल का लागत मूल्य भी नहीं निकाल पाएंगे। यह समझौता नहीं, बल्कि भारतीय किसानों के खिलाफ आर्थिक हमला है। इससे मंडियां बर्बाद होंगी। एमएसपी व्यवस्था कमजोर होगी और खेती पूरी तरह निजी कंपनियों के कब्जे में चली जाएगी। रतनमान ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर न तो किसान संगठनों से बात की और न ही संसद में खुली चर्चा करवाई। यह फैसला लोकतंत्र की भावना के खिलाफ और किसानों के साथ खुला धोखा है। उन्होंने चेतावनी दी अगर सरकार ने यह किसान विरोधी समझौता तुरंत रद्द नहीं किया, तो भारतीय किसान यूनियन सड़कों से लेकर संसद तक बड़ा आंदोलन छेड़ेगी। संवाद