जगाधरी। मैं खंड का गांव सुढैल हूं। जिला मुख्यालय मुझ से मात्र 10 किलोमीटर दूर है। भले ही मैं शहर से सटा हूं, लेकिन मेरी हालत खस्ता है। गंदगी, गंदे पानी से लबरेज गलियां और ओवरफ्लो जोहड़ मेरी पहचान बन चुके हैं। मेरा सबसे बड़ा मर्ज सफाई व्यवस्था है। सफाई व्यवस्था न होने के कारण मेरे परिवार के लोगों को रोजाना भारी परेशानियों से गुजरना पड़ता है।
मेरे कुनबे में करीब 2800 लोग रहते हैं। वहीं मतदाताओं की संख्या करीब 1500 है। 85 प्रतिशत लोग साक्षर हैं और मेरे कई लाल सरहद पर देश की रक्षा के लिए डटे हुए हैं। मेरे बच्चों में देश सेवा का जज्बा कूट-कूटकर भरा हुआ है। हर बच्चा सेना में भर्ती होने का सपना देखते हुए बड़ा होता है। वहीं अपनी धरती की हालत देखकर दुखी भी रहते हैं। आमदनी के बाद भी मेरे मर्ज का इलाज नहीं हो पाया। ओवरफ्लो जोहड़ के चलते गंदगी का आलम है और इससे लोगों को रोजाना दो चार होना पड़ रहा है।
गंदगी का हो समाधान
रणधीर सिंह ने कहा कि गांव में गंदगी सबसे बड़ी समस्या है। जिससे अकसर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सफाई न होने के कारण विभिन्न तरह की बीमारियों का खतरा रहता है। बच्चे गांव में घूम तक नहीं सकते हैं। बारिश के समय में लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। जिससे लोगों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। इसका स्थायी समाधान बहुत जरूरी है।
निकासी का हो स्थायी प्रबंध
राजकुमार ने बताया कि गांव में पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है। गांव का जोहड़ सालों से ओवरफ्लो है। जिससे पानी घरों में बैक मारता है। बारिश में समस्या और भी गंभीर हो जाती है। गलियों में पानी भरने से लोग निकल नहीं पाते हैं। गंदे पानी के कारण गांव में बदबू व गंदगी का आलम है। घरों में जहरीले कीट तक निकलना सामान्य बात हो गई है। इसका स्थायी समाधान जरूरी है।
स्टेडियम की हो गांव में व्यवस्था
दविंद्र सिंह ने कहा कि उनके गांव के कई लोग सेना में भर्ती होकर देशसेवा में जुटे हैं। गांव के युवकों का सपना सेना में भर्ती होना है। इसके लिए युवक, किशोर ही नहीं बल्कि बच्चे भी दिन रात मेहनत करते हैं। सेना भर्ती के लिए कड़े परिश्रम व अभ्यास की जरूरत है लेकिन गांव में मैदान न होने के कारण उन्हें परेशानी होती है। युवाओं को अभ्यास के लिए दूर जाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानियों बच्चों व लड़कियों को होती है। गांव में खेल मैदान जरूरी है।
लाइट की हो व्यवस्था
सुखदेव सिंह ने कहा कि दिन ढलते ही आधा गांव अंधेरे में डूब जाता है। गांव में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था ठीक नहीं है। अंधेरे में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन इसका समाधान नहीं हुआ। आसपास खेत होने के कारण जंगली जानवर व कीटों का खतरा बना रहता है। लोगों को रात में फसल देखने खेत में जाना पड़ता है। ऐसे में लोगों को अपने स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है।