पाबंदी के बावजूद पश्चिमी यमुना नहर का रेलवे पुल क्रास कर रहे व्यक्ति को ट्रेन ने अपनी चपेट में ले लिया। ट्रेन की चपेट में आने के बाद वह नहर में गिर गया। इससे उसकी मौत हो गई। सूचना पर रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला। देर शाम तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। पुलिस ने शव को शिनाख्त के लिए पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया है। यह वहीं पुल है जहां पर तीन साल पहले रेलवे पुल क्रॉस करते हुए तीन युवक ट्रेन की चपेट में आ गए थे। वहीं कुछ दिन बाद मां-बेटी की भी ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से इस पुल से निकलने पर पाबंदी लगा दी थी। पाबंदी के बावजूद लोग यहां से निकलते है और हादसों का शिकार होते है।
जीआरपी एसएचओ सुरेश कुमार ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि पश्चिमी यमुना नहर रेलवे पुल क्रॉस करते हुए एक व्यक्ति ट्रेन की चपेट में आकर नहर में गिर गया है। सूचना पर जीआरपी मौके पर पहुंची और नहर से शव को बाहर निकाला। पुलिस ने आसपास के लोगों से उसकी शिनाख्त कराने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने उसकी शिनाख्त नहीं की। उन्होंने मृतक के कपड़ों की तलाशी ली, लेकिन उसके पास से कोई दस्तावेज ऐसा नहीं मिला है। जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। मृतक की उम्र करीब 50 साल है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम रूम में रखवा दिया गया है। शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं।
शॉर्ट के चक्कर में गवांते है जान
रेलवे पुल पर अधिकतर हादसे रनथ्रू ट्रेनों के कारण होते है। बतां दे कि रेलवे पुल के दूसरी तरफ तीर्थ नगर व अन्य कॉलोनियों है। यहां के लोगों को मार्केट, स्टेशन व अन्य स्थानों पर जाने के लिए रेलवे पुल से होकर जाना शॉर्टकट पड़ता है। दूसरा रास्ता बाड़ी माजरा पुल या सहारनपुर रोड पुल से होकर है। जो दूर पड़ता है। इसलिए लोग इस पुल से निकलते है। ऐसे में यदि अंबाला की तरफ से रनथ्रू ट्रेन आ जाती है तो जब तक व्यक्ति पुल क्रॉस करता है तब तक उसके पास ट्रेन पहुंच जाती है और वह हादसे का शिकार हो जाता है। कुछ साल पहले हुए हादसे इसी कारण हुए थे। इसके बाद प्रशासन की तरफ से यहां से निकलने पर पाबंदी लगा दी थी। लेकिन इसके बाद भी लोग यहां से निकलते हैं और हादसों को शिकार होते है।
पांसरा फाटक के नजदीक दस फरवरी को रामनगर चंडीगढ़ सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12527) के आगे कूूदकर जाने देने वाले व्यक्ति की बुधवार को भी शिनाख्त नहीं हो पाई। व्यक्ति का शव शिनाख्त के लिए 72 घंटे के लिए यमुनानगर सिविल अस्पताल के शव गृह में रखवाया हुआ है। यदि इस अवधि में पहचान नहीं हुई तो वीरवार को रेलवे पुलिस स्वयं ही पोस्टमार्टम करवा देगी।