गलत दिशा से आ रही कार को बचाने के चक्कर में कालका से हरिद्वार जा रही श्रद्धालुओं से भरी बस पलट गई। हादसा रविवार सुबह बिलासपुर-छछरौली रोड पर गांव शाहपुर के पास हुआ। हादसा तीव्र मोड़ पर अचानक सामने आई कार को बचाने के चक्कर में हुआ। बस पलटते ही चीखो पुकार मच गई। आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और लोगों को बचाने में जुट गए। हादसे में एक दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि एक दर्जन अन्य आंशिक रूप से घायल हो गए। हादसे में एक किशोरी सहित 15 महिलाएं व अन्य आठ पुरुष घायल हो गए। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस व एंबुलेंस कंट्रोल रूम में दी। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद लोगों को बाहर निकाला और एंबुलेंस सहित अपने साधनों से अस्पताल पहुंचाया। हादसे की सूचना जंगल की आग की तरह फैल गई। जिसके बाद घटना स्थल पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। हादसे के बाद कई घंटे रोड जाम रहा। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने सड़क सुचारू की। गनीमत रही की हादसे में किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ। वहीं बस पलटते ही गलत दिशा से आ रहा चालक कार सहित फरार हो गया। घायलों को बिलासपुर और छछरौली के सामुदायिक केंद्रों में प्राथमिक उपचार दिया गया और पंचकूला रेफर कर दिया। बस में चालक परिचालक सहित 52 लोग सवार थे।
इस तरह हुआ हादसाकालका निवासी गुरनाम सिंह ने बताया कि वह बस चलाता है। उनकी टूरिस्ट एजेंसी से एक 52 सीटर बस कालका से हरिद्वार के लिए बुक की गई थी। रविवार को निर्धारित समय पर वह बस लेकर कालका से चला था। बस सवार सभी श्रद्धालु कालका के थे और सुबह सात बजे रवाना हुए थे। बस में उसके साथ परिचालक सहित 52 लोग सवार थे। उन्हें हिमाचल के पांवटा से होते हुए हरिद्वार जाना था। इस दौरान वह बिलासपुर-छछरौली रोड स्थित गांव शाहपुर के पास पहुंचे तो गलत दिशा से एक तेज रफ्तार फॉरच्यूर कार उनकी तरफ आ रही थी। चालक से कार कंट्रोल नहीं हो रही थी और वह लहराता हुआ बस की तरफ आ रहा था। कार बचाने के चक्कर में बस खेत में पलट गई। हादसे के बाद फॉरच्यूनर चालक कार सहित फरार हो गया।
बस पलटते ही सवार श्रद्धालु चीखने पुकारने गले। सभी अपनी सीटों से उड़ते हुए नीचे गिरे। महिलाओं व बच्चों की चीखें दूर दूर तक सुनाई पड़ी। चीख पुकार सुनकर शाहपुर सहित आसपास के लोग मौके पर दौड़े। लोगों ने बस में फंसे श्रद्धालुओं को निकाला और सूचना पुलिस को दी।
बस में ज्याद महिलाएं थे। हादसे के बाद दशहत और सदमें में महिलाएं चीखने लगी। इस दौरान चालक गुरनाम सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। पलटने से बस का शीश टूट गया था। जिस पर चालक ने पूरा शीश तोड़ दिया और बाहर निकलने का रास्ता बनाया। चालक गुरनाम चालक सीट के पास ही लेट गया और अंदर फंसे लोगों का हाथ पकड़कर बाहर निकालने लगा। बस में बच्चे भी थे। जो हादसे के बाद दशहत में आ गए। वे समझ ही नहीं पाए कि उनकी मदद की जा रही। गुरनाम ने बहुत ही मशक्कत के बाद लोगों को बाहर निकाला। इस दौरान ग्रामीण और पुलिस भी पहुंच गई। जिसके बाद बचाव कार्य में तेजी आई। बस सवार 23 श्रद्धालु इस हादसे में घायल हो गए।
घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। जिन्हें थोड़ी चोट आई थी उन्हें वहीं प्राथमिक उपचार दे दिया गया। वहीं गंभीर घायलों को ट्रामा सेंटर रेफर किया जा रहा था। जिस पर श्रद्धालु बोले कि उन्हें पंचकूला रेफर किया जाए। सभी कालका के रहने वाले हैं ऐसे में परिजन और उन्हें वहां राहत मिलेगी। जिस पर एसएमओ डॉ. शमा प्रवीन ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों को पंचकूला रेफर कर दिया।
इस हादसे में गनीमत यह रही कि किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ। वहीं अनियंत्रित फॉरच्यूनर चालक भी सलामती से चला गया। चूंकि यह बस की रफ्तार अधिक नहीं थी। जिस कारण बस पलटने पर भी उसके शीशे नहीं टूटे। अगर रफ्तार अधिक होती तो हादसा बड़ा हो सकता था।
हादसे में कालका के मुरारी मोहल्ला निवासी 12 वर्षीय हिमानी, मोना व उसकी देवरानी सुधा, हाउसिंग बोर्ड निवासी 67 साल का तरसेम गुप्ता व उसकी पत्नी 60 साल की कमलेश गुप्ता, 50 साल की इंदू व उसका पति सुनील कौशल, प्रवीण व उनकी पत्नी सुमन, 72 साल का विनोद कुमार व उनकी पत्नी शशी, 60 साल का पिंजौर के रतपुर निवासी 60 वर्षीय प्रेमचंद, इसी गांव का 45 वर्षीय जग्गी, कालका के टिपरा निवासी 40 साल की ओनिमा, डाकघर के पास रहने वाली 45 वर्षीय आशु, रेलवे कॉलोनी की मनीषा व उनकी मां बेबी, सोनिया, हर्ष सिंघल, 50 साल की पारूल, बेला, 30 वर्षीय आशु, कैलाश रानी के सिर, छाती व बाजू पर चोट लगी।