संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में पॉश एरिया से लेकर सेक्टरों, कॉलोनियों, मोहल्लों व गांवों में खंभों पर बिजली व केबल तार के जाल झूल रहे हैं। यह क्षेत्र की सुंदरता बिगाड़ने के साथ कई बार हादसों की भी वजह बन चुके हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों के अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं है।
विधानसभा चुनाव के माहौल में लोग मामले में कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों को मुद्दे पर अपना पक्ष जनता के समक्ष रखना चाहिए कि वह किस तरह इस समस्या से समाधान दिलाएंगे। लोगों का कहना है पूरे जिले में यह समस्या है। कई बार तारों के कारण हादसे हो चुके हैं। इससे लोगों को जान तक चली गई है। तारों ने कारण घरों, दुकानों आदि में आग लगने से लोगों का आर्थिक नुकसान भी हुआ है। वहीं ग्रामीण इलाकों में तार टूटने से हर साल हजारों एकड़ फसलों जल जाती हैं।
कृष्ण ने कहा कि बिजली व स्ट्रीट लाइट के खंभों पर बिजली व केबल तारों के जाल झूल रहे हैं। ऐसा किसी एक जगह नहीं बल्कि पूरे जिले में देखने को मिल जाएगा। कई बार तारों में शॉर्ट सर्किट से खंभों पर लगे बिजली मीटर आग लगने से नष्ट हो चुके हैं। कई लोगों के करंट लगने व झुलसने की घटनाएं भी हो चुकी है। इसके बाद भी संबंधित विभागों के अफसर मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे।
इंद्रराज ने कहा कि बिजली व केबल तारों के जाल केवल खंभों पर नहीं बल्कि कई जगह मकानों, दुकानों व अन्य भवनों की छतों पर हैं, जहां बारिश के बाद जलभराव भी होता है। ऐसे में खासकर बिजली के तारों से दीवारों में करंट आने की आशंका रहती है। इससे हादसों का डर है, इसलिए मामले में बिजली निगम को सभी जगह बिजली के तार कसने चाहिए। साथ ही जहां अतिरिक्त तार है, हटाया जाना चाहिए।
लक्ष्य दत्ता ने कहा कि रामपुरा, ग्रीन पार्क, सेक्टर-17, 18, 15, मॉडल टाउन, प्रोफेसर कॉलोनी सहित दर्जनों कॉलोनियां, मोहल्ले व बाजार हैं, जहां बिजली व स्ट्रीट लाइट के खंभों पर बिजली व केबल तारों के जाल देखे जा सकते हैं, पर कार्रवाई करने का अधिकार रखने वाले विभागों के अफसर यह हाल देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं।
राकेश ने कहा कि खंभों पर बने बिजली व केबल के तारों के जाल क्षेत्र की सुंदरता भी बिगड़ रही है। कई जगह दुकानों व मकानों के आगे यह ताल बहुत कम ऊंचाई पर झूल रहे हैं, जिससे हादसे का भी डर है। मामले में नगर निगम, बिजली निगम सहित जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा सकती है, पर ऐसा नहीं हो रहा। अब चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों को इस मुद्दे पर जनता के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए।