संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन स्थानक मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 89वें दिन प्रवचन करते हुए महा साध्वी डॉक्टर स्वाति महाराज ने फरमाया कि भगवान महावीर स्वामी ने क्रोध के विषय में कहा है कि क्रोध प्रीति का नाश कर देता है। चाहे कितने ही लंबे समय से रिश्ता चल रहा हो, चाहे रिश्तों में कितना ही ज्यादा प्यार हो एक मिनट के गुस्से से सब कुछ खत्म हो जाता है।
उन्होंने कहा कि क्रोध आते ही व्यक्ति का विवेक खत्म हो जाता है, फिर व्यक्ति यह नहीं देखता कि मेरे सामने कौन खड़ा है। मेरे माता-पिता है, भाई बंधु हैं, मित्र हैं, रिश्तेदार हैं या पूज्य गुरुजन हैं। गुस्से में पागल बन जाने से मुंह में जो भी आता है वह बोल देता है और रिश्ते सदा के लिए समाप्त हो जाते हैं। क्रोध की अग्नि में सारे सद्गुण नष्ट हो जाते हैं।
क्रोध के हजारों हजार दुष्परिणाम हमारे सामने आते हैं कि गुस्से में आकर भाई ने अपने सगे भाई को मार दिया किसी ने अपने प्रिय मित्र को मार दिया। गुस्से से व्यक्ति काबू से बाहर हो जाता है। इसलिए प्रभु ने कहा हमें स्वयं पर नियंत्रण रखना चाहिए और समभाव रहना चाहिए। क्रोध न करने से मन शांत रहता है। क्रोध न करने से संबंध मधुर होते हैं। क्रोध न करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। क्रोध न करने से बुद्धि तेज होती है। क्रोध न करने से जीवन सुखी होता है।
क्रोध न करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। क्रोध न करने से दूसरों का सम्मान मिलता है। क्रोध न करने से जीवन की समस्याएं कम होती हैं। क्रोध न करने से मानसिक शांति मिलती है। क्रोध न करने से जीवन सार्थक होता है। क्रोध एक ऐसी भावना है जो हमारे अंदर किसी भी समय उत्पन्न हो सकती है।
यह एक सामान्य मानवीय भावना है, लेकिन जब यह हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो यह हमारे जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। अमूमन हमें क्रोध इन कारणों से आता है। किसी के द्वारा अपमान या सम्मान नहीं मिलना किसी द्वारा धोखा देना
किसी के द्वारा हमारे साथ अन्याय करना हमारी अपेक्षाओं को पूरा न करना, हमारे लक्ष्यों को प्राप्त न करने में असमर्थता क्रोध के कितने ही नुकसान हैं। इसलिए पुरानी मात्रा को कोशिश करनी चाहिए कि गुरुओं के चरणों में ध्यान लगाकर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें और क्रोध पर काबू पाकर अपने दुश्मन को भी प्यार से जीत लें।