संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शिक्षाविद, साहित्यकार एवं पर्यावरण मित्र गोबिंद सिंह भाटिया को जल सरंक्षण का जुनून सवार है। उनके इसी जुनून ने उन्हें वाटरमैन बना दिया है और लोग उन्हें इसी नाम से जाते हैं। पेशे से शिक्षक रहे गोबिंद से भाटिया सेवानिवृत्ति के बाद पूरी तरह जल सरंक्षण के काम में जुट गए हैं। वे हर महीने अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा जल सरंक्षण के लिए खर्च कर देते हैं।
वे जल बचाने व पौधे लगाने का संदेश वाले पर्चे, पोस्टर, स्टीकर अपने साथ बाइक व कार की डिग्गी में रखते हैं। पार्क, सब्जी मंडी, अनाज मंडी, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को पानी व्यर्थ न बहाने के लिए जागरूक व प्रेरित करते हैं। वे अकसर सार्वजनिक स्थानों व कार्यक्रमों में जल संरक्षण का बोर्ड लेकर जाते हैं और लोगों के बीच में बोर्ड लेकर खड़े हो जाते हैं। वे सार्वजनिक स्थलों पर जल सरंक्षण का संदेश लिखी टी-शर्ट पहनकर जाते हैं।
इससे लोगों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित होता है और लोगों इस बारे में बात करते हैं। इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों व विभिन्न बस्तियों में सभाएं कर लोगों को जल व पर्यावरण का संदेश देते हैं। भाटिया को जल संरक्षण का ऐसा जुनून सवार है कि वे हमेशा अपने साथ प्लंबर का सामान रखते हैं। इसके लिए उन्होंने एक विशेष बैग रखा हुआ है।
इस बैग पाइप, रिंच, पाना, सफेदा, सूत, टोंटियां, निप्पल, नोजल सहित अन्य सामान है। यदि रास्ते में उन्हें कहीं भी कोई नल टूट या लीक दिखाई देता है तो वह उसे ठीक करने लग जाते हैं। गलियों में लगे नल की टोंटियां बदलना, लीकेज रोकना उनकी दिनचर्या है। उनकी टी शर्ट पर लिखा है कि आज हमारे द्वारा बचाई गई पानी की एक एक बूंद अमृत वरदान सिद्ध होगी।
उनका कहना है कि पृथ्वी पर तीन तिहाई भाग पर पानी है, लेकिन इसमें से उपयोग करने योग्य केवल एक प्रतिशत ही है। वहीं, इसके व्यर्थता से पानी की कमी हर दिन बढ़ती जा रही है। विश्व की लगभग 40 प्रतिशत आबादी जल संकट से जूझ रही है। कई क्षेत्रों में पानी को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि हमारा धन, व्यापार व सुविधाएं तब निरर्थक हो जाएंगी, जब आने वाली पीढि़यों को पीने के लिए स्वच्छ पानी ही उपलब्ध नहीं होगा।