संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कपालमोचन में 15 नवंबर को आस्था का अनूठा संगम होगा। मान्यता है कि यहां बने कपालमोचन, ऋणमोचन और सूरजकुंड तीनों सरोवरों में श्रद्धा की एक डुबकी लगाने से दुख दूर हो जाते हैं। कहा जाता है कपाल मोचन स्थित सोम (सूरजकुंड) सरोवर में स्नान करने से भगवान शिव ब्रह्म दोष से मुक्त हुए थे। इसी वजह से यहां हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है जिसमें लाखों लोग पाप मुक्ति के लिए सरोवरों में स्नान करने पहुंचते हैं इसलिए यह कपालमोचन मेला के नाम से विख्यात है।
मान्यता के अनुसार कपालमोचन सरोवर में स्नान करने से पाप मिटते हैं, ऋणमोचन में स्नान करने से ऋण से मुक्ति मिलती है। कपालमोचन और ऋणमोचन सरोवर में स्नान करने के बाद श्रद्धालु सूरज कुंड में सरोवर में स्नान करते हैं। इस सरोवर से भी अनेक दंत कथाएं जुड़ी हुई हैं। भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत युद्ध के बाद पांडवों के साथ इस सरोवर में स्नान किया था।
कपालमोचन सरोवर के एक तरफ पर काला गऊ-बच्छा व एक छोर पर सफेद गऊ-बच्छा घाट है। ऐसा मानना है गऊ ने मालिक की हत्या कर दी थी। इससे उसका बछड़ा काला पड़ गया था। उन्होंने कार्तिक पूर्णिमा पर कपालमोचन सरोवर में स्नान किया तो उनका रंग सफेद हो गया और उन्हें हत्या के पाप से मुक्ति मिल गयी थी। गुरु गोविंद सिह व गुरु नानक देव जी भी कार्तिक पूर्णिमा पर यहां आये थे। तभी से सिखों ने यहां गुरु नानक देव जी का जन्मदिवस मनाना शुरू कर दिया। इसके बाद यहां कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगने लगा।
पितरों की शांति के लिए आए थे देवता
कपालमोचन के ही पवित्र धरती पर पितरों की शांति के लिए कभी देवता आए थे। इस तीर्थस्थल में हिंदू, सिख मुस्लिम धर्म के लोगों की आस्था है। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु पवित्र सरोवरों में स्नान कर मोक्ष की कामना करते हैं। कपालमोचन तीर्थ स्थल का अपना ही महत्व है। वेदों में वर्णित भी है कि सारे तीर्थ बार-बार कपालमोचन एक बार। यहां द्वापर, त्रेता कलयुग का इतिहास सिमटा है। शास्त्रों के अनुसार यहां श्रीराम, श्रीकृष्ण, पांडव कौरव भी पितरों की शांति के लिए आए। कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन ने यहां शस्त्र धोकर पितरों की शांति के लिए पूजा अर्चना की।
गुरु गोबिंद सिंह ने दस्तारबंदी की प्रथा की थी शुरू
इस तीर्थस्थल में सबसे अधिक मान्यता सिख धर्म के श्रद्धालुओं की है। यहां पहली पातशाही गुरु नानक देव, दसवीं पातशाही गुरु गोबिंद सिंह के दो गुरुद्वारे हैं। गुरु नानक देव जी ने अपना जन्मदिन यहां ठहर कर मनाया। वहीं गुरु गोबिंद सिंह ने दस्तारबंदी की प्रथा यहीं से शुरू की थी। भंगानी का युद्ध जीत कर वापसी के दौरान गुरु साहिब यहां 52 दिन तक रुके और सिख समुदाय के लोगों को दस्तार का हुक्म दिया। वहीं राजा अकबर के भी यहां आने के साक्ष्य मिलते हैं। बाबा दुधाधारी की मजार भी लोगों की आस्था का केंद्र मानी जाती है।
ऋण मोचन सरोवर । संवाद- फोटो : Yamuna Nagar
सूरजकुंड सरोवर। संवाद- फोटो : Yamuna Nagar