संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की तरफ से आयोजित सात दिवसीय श्री कृष्ण कथा के अंतिम दिन साध्वी कालिंदी भारती ने मीराबाई के जीवन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एक भक्त कभी स्वार्थी नहीं होता, वह तो परमार्थ रूपी पुष्प को हाथ में लेकर जन-जन में उसकी सुगंध फैलाता है।
साध्वी ने कहा कि भक्त मीराबाई केवल परमात्मा के रंग में रंगी हुई एक अंतर्मुखी आत्मा ही नहीं थीं। वह क्रांति की ऐसी प्रचंड ज्वाला थी, जिसने समाज की कई कुरीतियों का विरोध किया और समाज को सत्य के मार्ग की ओर प्रेरित भी किया। उनके जीवन चरित्र की कई घटनाएं आती हैं जिनमें उन्होंने पशुओं की बलि देने से मना कर दिया और उनके पति की मृत्यु होने पर उन्होंने सती प्रथा का भी विरोध किया।
उन्होंने एक ऐसे ब्राह्मण का अहंकार तोड़ा जो कभी स्त्री जाति का दर्शन तक नहीं करता था और स्वयं को ब्रह्मचारी कहलाता था। संसार के दुखों से कराहती हुई मानवता को उन्होंने भक्ति रूपी सुधा प्रदान की। उस अलौकिक आनंद से आत्माओं को पोषित किया जिसको पाने के पश्चात सदा सदा के लिए आत्मा पीड़ा मुक्त हो जाती है।
उन्होंने कहा कि भक्त मीराबाई दिव्य आत्मा थीं। जहां-जहां उनके चरण पड़े वह धरती भक्ति, प्रेम, करूणा एवं वात्सल्य से परिपूर्ण हो गई, क्योंकि भक्ति सभी सुखों की जननी है। जहां भक्ति आती है वहां व्यक्ति के भीतर सद्गुण उपजते हैं और सभी वांछित सांसारिक सुखों की प्राप्ति भी होती है।
उन्होंने कहा कि हमारे ब्रह्मज्ञानी संतों महापुरुषों के द्वारा लिखे हुए शास्त्र एवं भगवान की कथाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं बल्कि ये उस इत्र के समान हैं जो अपने संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को अपनी दिव्य सुगंध से सुगंधित करता है। हम सभी प्रभु के चरणों में अपनी अंतर आत्मा से यह प्रार्थना करें कि हम भी उस परमात्मा के शाश्वत प्रेम रूपी इत्र के ग्राहक बन पाएं। क्योंकि अपने जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करना और जीवन को शांत, सुखी और समृद्ध बनाना केवल हमारा कर्तव्य है।