संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले की ग्रामीण क्षेत्र में विकास की अहम धूरी मानी जाने वाली जिला परिषद की जमीन पर अवैध कब्जों का मामला बढ़ता जा रहा है। विभिन्न गांवों में जिला परिषद की कई एकड़ जमीन पड़ी है, लेकिन इनमें से काफी हिस्सों पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इस मुद्दे को लेकर जिला परिषद की मासिक बैठक में भी चर्चा हुई, जिसमें इसे गंभीरता से निपटाने का निर्णय लिया गया।
जिला परिषद ने निर्णय किया है कि सभी जमीनों की सही पहचान व निशानदेही के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में अधिकारियों के अलावा जिला पार्षद भी शामिल होंगे। कमेटी का काम होगा कि जिले की प्रत्येक जिला परिषद की जमीन का सर्वे कर उसे सूचीबद्ध किया जाए और अवैध कब्जों की पहचान कर उन्हें हटाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
जिला पार्षद धर्मपाल तिगरा ने बताया कि वे कई वर्षों से जिला परिषद की जमीन पर अवैध कब्जों का मुद्दा हाउस में उठा रहे हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला परिषद कार्यालय के सामने भी जमीन पर अवैध कब्जा है। इस जमीन पर तो बिजली निगम ने कब्जा करने वालों को बिजली मीटर का कनेक्शन तक दे दिया है, जो कानून और नियमों की उल्लंघन की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।
अवैध कब्जों की वजह से विकास कार्यों में भी बाधा आती है। कई योजनाओं और निर्माण कार्यों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि कमेटी जल्द से जल्द अपनी कार्रवाई शुरू करे और कब्जाधारियों को हटाने के साथ जमीन को सही तरीके से विकास कार्यों के लिए सुरक्षित किया जाए।
जिला परिषद की जमीन पर कहीं भी अवैध रूप से कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। यदि कहीं पर कब्जा है तो उसकी पहचान के लिए एक कमेटी बनाई जा रही है। जिसमें पार्षदों को भी शामिल किया जाएगा। वहीं पार्षदों से भी अपील है कि यदि उनके वार्ड में कहीं जिला परिषद की जमीन पर कब्जा है तो उसकी सूचना दें ताकि उसे मुक्त कराया जा सके। - रमेश ठसका, चेयरमैन, जिला परिषद।