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सांसदों ने अधिकारियों को लगाई फटकार

Sat, 03 Aug 2013 05:35 AM IST
Yamuna Nagar
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यमुनानगर। जिला सतर्कता कमेटी की बैठक में आए सांसदों ने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल ने आंकड़ों और फोटो के माध्यम से अधिकारियों को जमीनी हकीकत का आईना दिखाया। जिला सचिवालय में हुई बैठक में सांसद नवीन जिंदल करीब चार बजे पहुंचे। उन्होंने आते ही अपनी टीम द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों और फोटो को प्रोजेक्टर पर दिखाकर अधिकारियों द्वारा सच्चाई पर डाले जा रहे पर्दे को हटाने का काम किया।
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सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए स्टेडियमों को सचित्र पर्दे पर दिखाया। गोलनी, नागल और अन्य गांवों में बने स्टेडियम में ग्राउंड मैन होने के बावजूद खेल मैदान के भीतर तीन-चार फुट ऊंची घास उगी थी और फर्श और बैठने के लिए बनी सीढ़ियों पर क्रेक आ गए हैं। गोलनी के स्टेडियम में ट्यूबवेल लगने के बावजूद इसमें आज तक बिजली कनेक्शन नहीं लगा। सांसद ने इसका जवाब मांगा तो पता चला कि जिला खेल अधिकारी बैठक में मौजूद नहीं हैं। सांसद ने उन्हें फोन कर बैठक में बुलवाने को कहा। स्टेडियमों में ऊंची घास उगी है तो युवा कहां खेलेंगे। अधिकारियों को सीख देते हुए सांसद ने कहा कि यदि काम करने का जज्बा हो तो काम में कोई रुकावट नहीं आ सकती। स्टेडियम की घास को खिलाड़ियों की मदद से भी कटवाया जा सकता है। बाद में बैठक में आए जिला खेल अधिकारी परमिंद्र सिंह ने सभी स्टेडियम की खामियों को दूर करवाने की बात कही।
सांसद की टीम ने जिले की आंगनबाड़ियों की असलियत को भी दिखाया। इस टीम द्वारा जिले की सरकारी बिल्डिंग में चल रही आंगनबाड़ी की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के अनुसार 28 प्रतिशत आंगनबाड़ियों में पेयजल, 34 प्रतिशत आंगनबाड़ियों में शौचालय और 56 प्रतिशत आंगनबाड़ियों में बिजली का कनेक्शन नहीं है। सांसद ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि जब आंगनबाड़ियों में पानी, बिजली और शौचालय ही नहीं होंगे तो यहां आने वाले बच्चों को कितने परेशानी होती होगी, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है। इस पर विभाग की महिला अधिकारी ने यह कहकर खुद अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की कि जिले की आंगनबाड़ियों की स्थिति अन्य प्रदेशों की आंगनबाड़ियों से बेहतर है। इस पर सांसद ने उन्हें कहा कि अपनी कमजोरी छिपाने के बजाय हालात को सुधारने की ओर ध्यान दें।
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सांसद की टीम ने प्रोजेक्टर पर दिखाया कि रादौर के कूलपुर सरकारी स्कूल में अध्यापक नशे में चूर है और आसपास खड़े अध्यापक उनके होश में आने का इंतजार कर रहे हैं। सांसद ने जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत कौर से इस बाबत सवाल किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि यह मामला उनके नोटिस में आया था। इसके बाद अध्यापक को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके बाद प्रोजेक्टर पर फर्कपुर के सरकारी स्कूल के भीतर शौचालय से सटे ट्रांसफार्मर को दिखाया गया। सांसद ने कहा कि इससे तो बच्चों की जान को खतरा बना हुआ है। बिजली निगम के अधिकारी ने सांसद को कहा कि जिन स्कूलों के भीतर ट्रांसफार्मर लगे हैं, उन्हें जल्द ही हटवाया जा रहा है, वहीं खेड़ी लक्खा सिंह के सरकारी स्कूल में खुले में पक रहे मिड-डे मील को भी प्रोजेक्टर पर दिखाया गया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने सफाई दी कि जिन स्कूलों में रसोई नहीं बन पाई है, वहां रसोई बनाने का काम चल रहा है। स्कूल अध्यापकाें को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि खुले में मिड-डे मील न पकाएं। ऐसा न करने वाले अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।
प्रोजेक्टर पर दिखाया गया कि झगूड़ी गांव में गऊ घाट के निर्माण के लिए नवंबर 2011 को 1.80 लाख रुपये देने के बाद भी आज तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया है, वहीं बैंडी गांव में एससी चौपाल की चहारदीवारी के लिए डेढ़ साल पूर्व 50 हजार रुपये देने के बावजूद आज तक इसका निर्माण नहीं हो पाया है। इसके अलावा टोपरा गांव में श्मशान घाट की चहारदीवारी के लिए नवंबर 2011 को तीन लाख की राशि जारी करने के बाद भी यह काम आज तक पूरा नहीं हुआ। बीडीओ ने सांसद को सफाई दी। इस पर सांसद थोड़ा गर्म हो गए। उन्होंने यह कहकर बीडीओ की बोलती बंद कर दी कि आप जो सफाई दे रहे हैं उसकी जांच करा लें तो आप जवाब नहीं दे पाएंगे। सांसद ने कहा कि सांसद निधि कोष से होने वाले 31 कामों में अब तक 13 पर काम शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को अपने काम में सुधार लाने को कहा।
जिले के कई प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्राें को सचित्र प्रोजेक्टर पर दिखाते हुए उनकी कमियों को उजागर किया गया। किसी केंद्र में डाक्टर कम हैं तो कहीं स्टाफ की कमी है। कहीं पर्याप्त संसाधन और उपकरण नहीं हैं तो किसी केंद्र में डाक्टर के बैठने के लिए कुर्सी टूटी है। सांसद ने इस पर सिविल सर्जन डा. एमआर पासी से सवाल किया। सिविल सर्जन ने स्वास्थ्य केंद्रों की कमियों को जल्द दूर करने की बात कही।

सांसद सैलजा ने दिया अल्टीमेटम
करीब सवा घंटे बाद अंबाला सांसद कुमारी सैलजा भी बैठक में पहुंच गईं। उन्होंने भी मूलभूत सुविधाओं की खामियों और विकास कार्यों में देरी के लिए कई विभागोें के अधिकारियों को जमकर फटकारा। उनके मुख्य निशाने पर जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन रहे, वहीं पंचायती राज, शिक्षा विभाग और नगर निगम के अधिकारियों की भी क्लास लगाई। अधिकारियों के ढुलमुल रवैये और काम के प्रति लापरवाही से सांसद इस कदर गुस्से में थीं कि उन्होंने बैठक में मौजूद अतिरिक्त उपायुक्त को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि अगली मीटिंग तक अधिकारियों के रवैये में सुधार न हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई तय है।
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